संस्कृत-शब्दकोशः

युछ् युञ्छ्

युज्

युज् (वि०) [युज्+क्विन्]


(समास के अन्त में)
1. जुड़ा हुआ, मिला हुआ, जुता हुआ, खींचा जाता हुआ
2. सम, अविषम, पुं०
1. सम्मेलक, जो जोड़ देता है, मिला देता है
2. ऋषि मुनि, जो अपने आपको भावसमाधि में संलग्न रखता है
3. जोड़ा, दंपती (इस अर्थ में नपुं० भी) ।


युज्
i (रुधा० उभ० युनक्ति, युङ्क्ते, युक्त)
1. संमिलित होना, मिलना, अनुरक्त होना, संवद्ध होना, जुडना –तमर्थमिव भारत्या सुनया योक्तुमर्हसि–कु० ६।७९, दे० कर्मवा० नीचे
2. जोतना, जीन कसकर संनद्ध करना, लगाना–भानुः सकृद्युक्ततुरङ्ग एव –श० ५।४, भग० १।१४
3. सुसज्जित करना, से युक्त करना जैसा कि गुणयुक्त में
4. प्रयुक्त करना, काम में लगाना, इस्तेमाल करना –प्रशस्ते कमर्णि तथा सच्छब्दः पार्थ युज्यते –भग० १७।२६, मनु० ७।२०४
5. नियुक्त करना, स्थापित करना (अधि० के साथ)
6. निदेशित करना. (मन आदि का) स्थिर करना जमाना
7. अपना ध्यान संकेन्द्रित करना, –मन: संयम्य मच्चित्तो युक्त आसीत मत्परः. –भग० ६।१४, युञ्जन्नेवं सदात्मानं –१५
8. रखना, स्थिर करना, जमाना (अधि० के साथ)
9. तैयार करना, सुव्यवस्थित करना, सज्जित करना, युक्त करना
10. देना, प्रदान करना, सादर समर्पित करना–आशिषं युयुजे, कर्मवा० (युज्यते)
1. संमिलित होने के योग्य–रविपीतजला तपात्यये पुनरोधेन हि युज्यते नदी–कु० ४।४४, रघु० ८।१७
2. प्राप्त करना, स्वामी होना–इष्टेन युज्वस्व–श० ५, महावी० ७, रघु० २।६५
3. योग्य या सही होना, समुचित होना, उपयुक्त होना (अधि० या संबंध के साथ) –या यस्य युज्यते भूमिका तां खलु भावेन तथैव सर्वे वर्ग्याः पाठिता –मा० १, त्रैलोक्यस्यापि प्रभुत्वं त्वयि युज्यते–हि० १
4. तैयार होना–ततो युद्धाय युज्यस्व – भग० २।३८, ५०
5. तुल जाना, लीन होना, निदेशित होना –मनु० ३।७५, १४।३५, कि० ७।१३ । प्रेर० (योजयति-ते)
1. सम्मिलित होना, मिलना एकत्र करना –रघु० ७।१४
2. उपहार देना, समर्पण करना, प्रदान, करना–रघु० १०।५६
3. नियुक्त करना, काम पर लगाना, इस्तेमाल करना–शत्रुभिर्योजयेच्छत्रुम्–पंच० ४।१७
4. मुड़ना, किसी ओर निदेशित करना–पापान्निवारयति योजयते हिताय–भर्तृ० २।७२
5. उत्तेजित करना, प्रेरित करना, भड़काना
6. सम्पन्न करना, निष्पन्न करना
7. तैयार करना, सुव्यवस्थित करना, सुसज्जित करना–इच्छा० (युयुक्षति–ते) सम्मिलित होने की इच्छा करना, जोतने की इच्छा करना, देने की कामना करना,
अनु–
,(आ०)
1. पूछना प्रश्न करना–अन्वयुंक्त गुरुमीश्वरः क्षितेः – रघु० ११।६२, ५।१८, शि० १०।६८
2. परीक्षण करना, जांच करना – मनु० ७।७९,
अभि–
(आ०) चेष्टा करना, काम में पिल जाना
2. आक्रमण करना, धावा करना –भवन्तमभियोक्तुमुद्युङ्क्ते–दश०
3. दोषारोपण करना, दोषी ठहराना –मनु० ८।१८३
4. अधिकार जताना, मांग प्रस्तुत करना (जैसे कि किसी कानूनी अभियोग में)–विभावितैकदेशेन देयं यदभियुज्यते –विक्रम० ४।१७, याज्ञ० २।९
5. कहना, बोलना
उद्–
–उत्तेजित करना, सक्रियता उद्दीप्त करना
2. कोशिश करना, प्रयास करना –भवन्तमभियोक्तूमुद्युङ्क्ते–दश०
3. तैयार करना,
उप–
(आ०)
1. इस्तेमाल करना, काम में लगाना–षाङ्गुण्यमुपयुञ्जीत–शि० २।९३, पणबन्धमुखान्गुणानजः षड़ुपायुङ्क्त समीक्ष्य तत्फलम् रघु० ८।२१, मालवि० ५।१२
2. चखना, स्वाद लेना अनुभव करना (आलं० से भी) रघु० १८।४६, भट्टि० ८।३९
4. उपभोग करना, खाना–मनु० ८।४०,
नि–
(आ०)
1. नियुक्त करना, प्रतिनियुक्त करना, आदेश देना (अधि० के साथ) – यन्मां विधेयविषये स भवान्नियुङ्क्ते–मा० १।९, असाधुदर्शी तत्र भवान् काश्यपः य इमामाश्रमधर्मे नियुङ्क्ते –श० १, कु० ३।१३, रघु० ५।२९
2. सम्मिलित होना, मिलना
3. नियत करना आदिष्ट करना । (प्रेर०)
1. सम्मिलित करना, मिलाना, से युक्त करना, प्रदान करना–कु० ४।४२
2. जोतना, संनद्ध करना,
3. उकसाना, प्रेरित करना–भग० ३।१,
प्र–
(आ०)
1. इस्तेमाल करना, काम में लाना –अयमपि च गिरं नस्त्वत्प्रबोधप्रयुक्ताम्–रघु० ५।७५, सद्भावे साधुभावे च सदित्येतत्प्रयुज्यते–भग० १७।२६
2. नियत करना, काम में लगाना, निदेशित करना, आदेश देना–मा मां प्रयुङ्क्थाः कुलकीर्तिलोपे–भग० ३।५४, प्रायुङ्क्त राज्ये वत दुष्करे त्वाम्–३।५१, कु० ७।८५
3. देना, प्रदान करना, अभिदान करना – अशिषं प्रयुयुजे न वाहिनीम्–रघु० ११।६, २।७०, ५।३५, १५।८
4. हिलना–जुलना, गतिदेना–मरुत्प्रयुक्ताः (बाललताः)–रघु० २।१०
5. उत्तेजित करना, प्रेरित करना, प्रेरणा देना, हांकना–कु० १।२१, भग ३।३६
6. संपन्न करना, करना–रघु० ७।८६, १७।१२
7. रंगमंच पर प्रतिनिधित्व करना, अभिनय करना, नाट्य करना–उत्तरं रामचरितं तत्प्रणीतं प्रयुज्यते –उत्तर० १।२, परिषदि प्रयुञ्जानस्य मम –कु० १.
8. इस्तेमाल करने के लिए उधार देना, (घन आदि) ब्याज पर देना – मनु० ८।१४६,
वि–
(आ०)
1. छोड़ना, परित्याग करना–कि० २।४९, रघु० १३।६३
2. अलग–अलग करना–पुरो वियुक्ते मिथुने कृपावती –कु० ५।२६
3. ढीला करना, शिथिल करना,
विनि–
1. इस्तेमाल करना, व्यय करना
2. नियुक्त करना, काम में लगाना
3. बांटना, अनुभाजन करना, वितरण करना–प्रत्येकं विनियुक्तात्मा कथं न ज्ञास्यसि प्रभो–कु० २।३१
4. वियुक्त करना, अलग करना,
सम्–
सम्मिलित होना (कर्मवा० में)–संयोक्ष्यसे स्वेन वपुर्महिम्ना – रघु० ५।२५, (प्रेर०) मिलाना, सम्मिलित करना ।
ii (भ्वा० चुरा० पर० योजति, योजयति) जोंड़ना, मिलाना, जोतना दे० ऊपर 'युज्' ।
iii (दिवा० आ० युज्यते) मन को संकेन्द्रित करना ('युज्' के कर्मवा० रूप के समरूप) ।



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