वर्जः [वृज्+घञ्]
छोड़ देना, परित्याग ।
वर्जम् (अव्य०) निकाल कर, बाहर करके, सिवाय (समास के अन्त में) गौतमीवर्जग्गितरा निष्क्रांताः श०४, कु०७।७२।