वर्ह (पुं०/नपुं०) [ बर्ह् +अच्]
1. मोर की पूँछ–दवोल्काहतशेषबर्हाः–रघु० १६।१४ (केशपाशे) सति कुसुम सनाथे कं हरेदेष बर्हः– विक्रम० ४।१०, पाठान्तर
2. पक्षी की पूँछ
3. पूँछ का पंख (विशेषकर मोर की) मेघ० ४४, कु० १।१५, शि० ८।११
4. पत्ता अपाण्डुरं केतकबर्हमन्यः–रघु० ६।१७
5. अनुचरवर्ग, नौकर–चाकर ।
समस्त पद
~भारः
1. मोर की पूँछ
2. मोरछल, लाठी की मूठ में बंधा मोर के पंखों का गुच्छा ।
वर्ह दे० बर्ह।