संस्कृत-शब्दकोशः

वश् वश्यका

वंश्य

वश्य (वि०) [वश्+यत्]


1. वश में होने के योग्य, नियन्त्रणीय, शासित होने के योग्य–आत्मवश्यैर्विधेयात्मा प्रसादमधिगच्छति–भग० २।६४
2. वशीभूत, विजित, सधा हुआ, विनीत –भग०६।३६
3. प्रभाव या नियन्त्रण में, अधीन, आश्रित, आज्ञाकारी–तस्य पुत्रो भवेद्वश्यः समृद्धो धार्मिकः सुधीः हि० प्र० १८, (प्रायः समास में) (मनः) हृदि व्यवस्थाप्य समाधिवश्यम् कु० ३।५०,
~श्यः
सेवक, आश्रित,
~श्या
विनम्रा या आज्ञाकारिणी पत्नी – यं ब्रह्माणमियं देवी वाग्वश्यवानुवर्तते उत्तर० १।२ (जिसका भाषा पर पूरा आधिपत्य है),
~श्यम्
लौंग ।


वश्यम् [वश्+यत्]


1. जो वश में किया जा सके
2. लौंग ।

परिशिष्ट


वंश्य (वि०) [वंशे भवः यत्]


1. मुख्य शहतीर से संबंध रखने वाला
2. मेरुदण्ड से संबंध रखने वाला
3. परिवार से संबंध रखने वाला
4. अच्छे कुल में उत्पन्न, उत्तम कुल का
5. वंशधर, वंशप्रवर्तक,
~श्यः
1. सन्तान परवर्ती (ब० व०) –इतरेऽपि रघोर्वंश्याः –रघु० १५।३५
2. पूर्वज, पूर्वपुरुष –नूनं मत्तः परं वंश्या पिण्ड: विच्छेददर्शिनः –रघु० १।६६
3. परिवार का कोई सदस्य
4. आरपार, शहतीर
5. भुजा या टांग की हड्डी
6. शिष्य ।


वंश्यः बन्धुः, संबंधी, अपने कुल का ।

परिशिष्ट



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