विप्रकर्षः [वि+प्र+कृष्+घञ्]
दूरी, फासला ।
विप्रकर्षः [विप्र+कृष्+घञ्]
1. खींचकर दूर करना2. (व्या० में) से व्यंजनों के बीच में कोई स्वर जो उन दोनों की भिन्नता दर्शावे ।
परिशिष्ट