संस्कृत-शब्दकोशः

विशोषण विश्रणन

विश्

विश् (तुदा० पर० विशति, विष्ट)
1. प्रविष्ट होना, जाना, दाखिल होना –विवेश कश्चिज्जटिलस्तपोवनम् –कु० ५।३०, रघु० ६।१०, १२, मेघ० १०२, भग० ११।२९
2. जाना या पहुंचना, अधिकार में आना, किसी के हिस्से में पड़ना –उपदा विविशुः शश्वन्नोत्सेकाः कोशलेश्वरम् –रघु० ४।७०
3. बैठ जाना, बस जाना
4. घुस जाना, व्याप्त हो जाना
5. स्वीकार करना, उत्तरदायित्व लेना,–प्रेर० (वेशयति–ते) घुसाना, प्रविष्ट कराना –इच्छा० (विविक्षति) प्रविष्ट होने की इच्छा करना,
अनु–
1. सम्मिलित होना
2. किसी का अनुगमन करना, बाद में प्रविष्ट होना,
अनुप्र–
सम्मिलित होना (आलं० से) दूसरे की इच्छानुसार अपने आप को ढालना,–
“यस्य यस्य हि यो भावस्तस्य तस्य हितं नरः ।
अनुप्रविश्य मेधावी क्षिप्रमात्मवशं नयेत् ॥”
–पंच० १।६८,
अभिनि–
(आ०)
1. सम्मिलित होना, अधिकार करना
2. सहारा लेना, अधिकार कर लेना –अभिनिविशते सन्मार्गम् –सिद्धा०, भयं तावत्सेव्यादभिनिविशते –मुद्रा० ५।१२, भट्टि० ८।८०,
आ–
1. प्रविष्ट होना –रघु० २।२६
2. अधिकार करना, कब्जे में ले लेना, काबू कर लेना
3. पहुँचना
4. किसी विशेष स्थिति पर पहुंचना,
उप–
1. बैठ जाना, आसन ग्रहण करना भग० १।४६
2. डेरा डालना
3. स्वीकार करना, अभ्यास करना –प्रायमुपविशति
4. उपवास करना –भट्टि० ७।७५,
नि–
(आ०)
1. बैठ जाना, आसन ग्रहण करना –नवांबुदश्यामवपुर्यविक्षत (आसने) –शि० १।१९
2. पड़ाव डालना, डेरा लगाना –रघु० १२।६८
3. प्रविष्ट होना, रामशालां न्यविक्षत –भट्टि० ४।२८, ६।१४३, ८।७, –रघु० ९।८२
4. स्थिर किया जाना, निर्दिष्ट किया जाना –सूर्यनिविष्टदृष्टि: –रघु० १४।६६
5. व्यस्त होना, अनुषक्त होना, तुल जाना, अभ्यास करना –श्रुतिप्रामाण्यतो विद्वान्स्वधर्मे निविशेत वै –मनु० २।८
6. विवाह करना (निर्विश्' के स्थान पर), (प्रेर०)
1. जमाना, निर्दिष्ट करना, (मन, चित्त) लगाना, भग० १२।८
2. स्थित करना, धरना, रखना –रघु० ६।१६, ४।३९ ७।६३
3. बिठाना, स्थापित करना –रघु० १५।९७
4. जीवन में स्थित कराना, विवाह कराना –श० ४।१९
5. (सेना आदि का) डेरा डालना –रघु० ५।४२, १६।३७
6. रेखांकन करना, चित्रित करना, चित्र बनाना –चित्रे निवेश्य परिकल्पितसत्त्वयोगा –श० २।९, मालवि० ३।११
7. लिख लेना, उत्कीर्ण करना –विक्रम० २।१४
8. सुपुर्द करना, सौंपना –रघु० १९।४,
निस्–
1. सुखोपभोग करना –ज्योत्स्नावतो निर्विशति प्रदोषान् – रघु० ६।३४, निर्विष्टविषयस्नेहः स दशांतमुपेयिवान् –रघु० १२।१, ४।५१, ६।५०, ९।३५, १३।६०, १४।८०, १८।३, १९।४७, मेघ० ११०
2. अलंकृत करना, आभूषित करना
3. विवाह करना,
प्र–
1. प्रविष्ट होना
2. आरम्भ करना, शुरु करना, (–प्रेर०) प्रस्तुत करना, प्रवेष्टा के रूप में आगे आगे चलना,
विनि–
रक्खा जाना, बिठाया जाना, (प्रेर०)
1. स्थिर करना, रखना –कु० १।४९, रघु० ६।६३, मदुरसि कुचकलशं विनिवेशय –गीत० १२
2. बसाना, नई बस्ती बसाना –कु० ६।३७,
सम्–
1. प्रविष्ट होना
2. सोना, लेटना, आराम करना –संविष्ट: कुशशयने निशां निनाय –रघु० १।९५ मनु० ४।५५, ७।२२५
3. सहवास करना, मैथुन करना –षोडशर्तुनिशाः स्त्रीणां तस्मिन् युग्मासु संविशेत् –याज्ञ० १।७९, मनु० ३।४८
4. सुखोपभोग करना,
समा–
1. प्रविष्ट होना, भट्टि० ८।२७
2. पहुंचना
3. लग जाना, तुल जाना,
संनि–
(प्रेर०)–1. रखना, धरना
2. स्थापित करना, ऊपर धरना –रघु० १२।५८ ।


विश् (पुं०) [विश्+क्विप्]


1. तीसरे वर्ण का मनुष्य, वैश्य
2. मनुष्य
3. राष्ट्र, (स्त्री०)
1. राष्ट्र, प्रजा
2. पुत्री ।
समस्त पद
~पण्यम्
सामान, व्यापारिक माल,
~पतिः
(विशांपतिः भी) राजा, प्रजा का स्वामी ।


विश् (तुदा० पर०)
1. रंगमंच पर प्रकट होना
2. संयुक्त होना
3. आ पड़ना
4. (किसी कार्य में) व्यस्त हो जाना ।

परिशिष्ट


विश् (पुं०) [विश्+क्विप्]


1. बस्ती
2. संपत्ति,दौलत ।

परिशिष्ट



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