संस्कृत-शब्दकोशः

वृश्चिक वृषण

वृष

वृषः [वृष्+क]


1. साँड –असंपदस्तस्य वृषेण गच्छतः –कु० ५।८०, मेघ० ५२, रघु० २।३५, मनु० ९।१२३
2. वृष राशि
3. किसी वर्ग का मुख्य या उत्तम, अपने दल का सर्वश्रेष्ठ (समास के अन्त में) मुनिवृषः, कपिवृषः आदि
4. कामदेव
5. मज़बूत या व्यायाम शील व्यक्ति
6. कामातुर, रतिग्रंथों में वर्णित चार प्रकार के पुरुषों में से एक –दे० रति० ३७
7. शत्रु, विपक्षी
8. चूहा
9. शिव का नंदी बैल
10 नैतिकता, न्याय
11. गुण, सत्कर्म या पुण्यकार्य –न सद्गतिः स्याद् वृषवर्जितानाम् –कीर्ति० ९।६२, (यहाँ 'वृष' का अर्थ साँड भी है)
12. कर्ण का नामान्तर
13. विष्णु का नाम
14. एक विशेष औषधि का नाम
~षम्
मोर का पंख ।
समस्त पद
~अङ्कः
शिव का विशेषण –रघु० ३।२३
2. पुण्यात्मा, सद्गुणी
3. भिलावाँ
4. षंढ,
°जः
छोटा ढोल,
~अञ्चनः
शिव का विशेषण
~अन्तकः
विष्णु का विशेषण,
~आहारः
बिलाव,
~उत्सर्गः
मृत पुरुष के नाम पर दाग कर साँड़ छोड़ना,
~दंशः, ~दंशकः
बिलाव,
~ध्वजः
1. शिव का विशेषण –रघु० ११।४४
2. गणेश का विशेषण
3. सद्गुणी, पुण्यात्मा,
~पतिः
शिव का विशेषण,
~पर्वन्
(पुं०)
1. शिव का विशेषण
2. एक राक्षस का नाम जिसने असुराचार्य शुक्र की सहायता से बहुत दिनों तक देवताओं से संघर्ष किया, इसकी पुत्री शर्मिष्ठा का विवाह ययाति के साथ हुआ –दे० ययाति और देवयानी
3. वर्र, भिरड़,
~भासा
इन्द्र और देवताओं का आवास –अर्थात् अमरावती,
~लोचनः
बिलाव,
~वाहनः
शिव का विशेषण ।


वृषः [वृष्+क]


1. जल
2. भवननिर्माण के लिए भूखंड
3. नरजन्तु
4. साँड ।
समस्त पद
~लक्षणा
मरदानी स्त्री,
~सृक्विन्
(पुं०) भिड़ ।

परिशिष्ट



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