संस्कृत-शब्दकोशः

व्रज्या व्रणित

व्रण

व्रणः [व्रण्+अच्]


1. घाव, क्षत, जख्म, चोट –रघु० १२।५५
2. फोड़ा, नासूर ।
समस्त पद
~अरिः
बोल नामक गंधद्रव्य,
~कृत्
(वि०) घाव करने वाला, (पं०) भिलावे का पेड़,
~विरोपण
(वि०) घाव भरने वाला –श० ४।१३,
~शोधनम्
घाव का साफ करना तथा पट्टी बाँधना,
~हः
एरंड का पौधा ।


व्रणम् [व्रण्+अच्]


1. घाव, क्षत, जख्म, चोट –रघु० १२।५५
2. फोड़ा, नासूर ।
समस्त पद
~अरिः
बोल नामक गंधद्रव्य,
~कृत्
(वि०) घाव करने वाला, (पं०) भिलावे का पेड़,
~विरोपण
(वि०) घाव भरने वाला –श० ४।१३,
~शोधनम्
घाव का साफ करना तथा पट्टी बाँधना,
~हः
एरंड का पौधा ।



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