संस्कृत-शब्दकोशः

शुचिस् शुच्य्

शुच्

शुच् (स्त्री०) [शुच्+क्विप्]


रंज, शोक, कष्ट, दुःख–विकलकरणः पाण्डुच्छायः शुचा परिदुर्बल: –उत्तर० ३।२२, कामं जीवति मे नाथ इति सा विजहौ शुचम्–रघु० १२।७५, ८।७२, मेघ० ८८, श० ४।१८ ।


शुच्
i (भ्वा० पर० शोचति) खिन्न होना, दुःखी होना, शोक करना, विलाप करना –अरोदीद्रावणोऽशोचीन्मोहं चाशिश्रियत्परम् –भट्टि० १५।७१, २१।६, भग० १६।५
2. खेद प्रकट करना, पछताना,
अनु–
शोक मनाना, विलाप करना, खेद प्रकट करना – नष्टं मृतमतिक्रान्तं नानुशोचन्ति पंडिता: – पंच० १।३३३ –भग० २।११, वेणी० ५।४, उत्तर० ३।३२,
परि–
, विलाप करना, शोक मनाना ।
ii (दिवा० उभ० शुच्यति-ते)
1. खिन्न होना, दुःखी होना
2. आर्द्र होना
3. चमकना
4. स्वच्छ या निर्मल होना
5. कुम्हलाना, मुर्झाना ।



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