संस्कृत-शब्दकोशः

श्योनाक श्रङ्क्

श्र

श्रम् (दिवा पर० श्राम्यति, श्रान्त)
1. चेष्टा करना, उद्योग करना, मेहनत करना, परिश्रम करना
2. तपश्चर्या करना, (तपस्या के द्वारा) इन्द्रियदमन करना –कियच्चिरं श्राम्यसि गौरि–कु० ५।५०
3. श्रान्त होना, थकना, परिश्रान्त होना– रतिश्रान्ता शेते रजनिरमणी गाढमुरसि–काव्य० १०, शि० १४।३८, भट्टि० १४।११०
4. कष्टग्रस्त होना, दु:खी होना –यो वृन्दानि त्वरयति पथि श्राम्यतां प्रोषितानाम् –मेघ० ९९, प्रेर० (श्र-श्रा-मयति-ते) थकाना,
परि–
अत्यन्त थक जाना,–श० १,
वि–
1. विश्राम करना, आराम करना, ठहरना–कु० ३।९
2. थमना, अन्त होना, दे० 'विश्रान्त' भी–रघु० १।५४, उतरवाना, बसाना ।


श्रम् (प्रेर० –श्र –श्रामयति)
1. थकाना
2. जीतना, हराना ।

परिशिष्ट



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