संस्कृत-शब्दकोशः

श्लील श्लेषोपमा

श्लेष

श्लेषः [श्लिष्+घञ्]


1. आलिंगन
2. चिपकना, जुड़ना
3. मिलाप, संगम, संपर्क–निरन्तरश्लेषधनाः– का० (यहाँ इसमें अगला अर्थ भी घटित होता है)
4. अनेकार्थ शब्द प्रयोग, एक से अधिक अर्थ प्रकट करने वाले शब्दों का प्रयोग, द्व्यर्थक, किसी शब्द या वाक्य की दो या दो से अधिक अर्थों की संभाव्यता, (यह एक अलंकार समझा जाता है, कवि इसका बहुत प्रयोग करते हैं, परिभाषा के लिए दे० काव्य कारिका ८४ तथा ९६) –आश्लेषि न श्लेषकवेर्भवत्याः श्लोकद्वयार्थः सुधिया मया किम्–नै० ३।६९, दे० शब्दश्लेष' भी ।
समस्त पद
~अर्थः
अनेकार्थ शब्द प्रयोग, द्व्यर्थक शब्द प्रयोग,
~भित्तिक
(वि०) श्लेष पर टिका हुआ (शा० –आधारित) ।


श्लेषः [श्लिष्+घञ्]


1. आलिंगन, मैथुन
2. व्याकरण विषयक आगम संयोग
3. एक शब्दालंकार जहाँ एक शब्द के कई अर्थों द्वारा काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है ।

परिशिष्ट



Correction: