यदृच्छा [यद्+ऋच्छ+अङ्+टाप्]
1. मनपसन्द करना, स्वेच्छा, (कार्य करने की) स्वतंत्रता
2. संयोग, घटना, इस अर्थ में प्रायः करण० एक व० में प्रयोग होता है और 'घटनावश', 'संयोगवश' शब्दों से अनुवाद किया जाता है–किंनरमिथुनं यदृच्छयाऽद्राक्षीत्–का०, 'देखने का संयोग हुआ', आदि –वसिष्ठधेनुश्च यदृच्छयाऽऽगता श्रुतप्रभावा ददृशेथ नन्दिनी – रघु० ३।४२, विक्रम० १।१०, कु० १।१४ ।
समस्त पद
~अभिज्ञः
ऐच्छिक अथवा स्वपुरस्कृत साक्षी
~संवादः
1. अकस्मात् वार्तालाप
2. स्वतःस्फूर्त अथवा संयोगवश मिलन, घटनावश मिलाप ।