यर्हि (अव्य०) [यद् + र्हिल्]
1. जब, जब कि, जब कभी2. क्योंकि, यतः, चूँकि, (इसका उपयुक्त सहसंबन्धी 'तर्हि' या 'एतर्हि' है परन्तु अत्युत्तम साहित्य में इसका विरल प्रयोग है) ।