संस्कृत-शब्दकोशः

यस्मात् याग

या

या (अदा० पर० याति, यात)
1. जाना, हिलना–जुलना, चलना, आगे बढ़ना,–ययौ तदीयामवलम्ब्य चाङ्गुलिम् –रघु० ३।२५, अन्वग्ययौ मध्यमलोकपाल: –२।१६
2. चढ़ाई करना, आक्रमण करना –मनु० ७।१८३
3. जाना प्रयाण करना, कूच करना (कर्म० या संप्र० के साथ अथवा 'प्रति' के साथ)
4. गुजर जाना, वापिस होना, बिदा होना
5. नष्ट होना, ओझल होना–यातस्तवापि च विवेकः–भामि० १।६८, भाग्यक्रमेण हि धनानि भवन्ति यान्ति –मृच्छ० १।१३
6. गुजर जाना, बीतना (समय का)–यौवनमनिवर्तिं यातं तु–काव्य० १०
7. टिकना
8. होना, घटित होना
9. जाना, घटना, होना (प्रायः भाववाचक संज्ञा के कर्म० के साथ)
10 उत्तरदायित्व संभालना– न त्वस्य सिद्धौ यास्यामि सर्गव्यापारमात्मना–कु० २।५४
11. मैथुनसंबंध स्थापित करना
12. प्रार्थना करना, याचना करना
13. ढूंढना, खोजना ('गम्' की भांति 'या' के अर्थ भी संयुक्त संज्ञा शब्द के अनुसार नाना प्रकार से बदलते रहते हैं–उदा० ‘अग्रे या’ आगे आगे चलना, नेतृत्व करना, मार्ग दिखाना, ‘अधो या’ डबना, ‘अस्तं या’ छिपना, अस्त होना क्षीण होना, ‘उदयं या’ उदय होना ‘नाशं या’ नष्ट होना, ‘निद्रां या’ सो जाना ‘पदं या’ पद प्राप्त करना, ‘पारं या’ पार जाना, स्वामी होना, पार कर जाना, आगे बढ़ जाना, ‘प्रकृतिं या’ फिर स्वाभाविक अवस्था को प्राप्त करना, ‘लघुतां या’ हलका होना ‘वशं या’ बस में होना, अधिकार में आना, ‘वाच्यतां या’ कलङ्कित या निन्दित होना, ‘विपर्यासं या’ परिवर्तित होना, रूप बदलना, ‘शिरसा महीं या’ भूमि पर सिर झुकाना आदि), प्रेर० (यापयति-ते)
1. चलाना, आगे बढ़ाना
2. हटाना, दूर हांकना–रघु० ९।३१
3. व्यय करना, (समय) बिताना–तावत्कोकिलविरसान्यापय दिवसान्–भामि० १।७, मेघ
4. सहारा देना, पालनपोषण करना, इच्छा (यियासति) जाने की इच्छा करना. जाने को होना;
अति–
1. पार जाना, अतिक्रमण करना, उल्लंघन करना
2. आगे बढ़ना,
~अधि–
चले जाना, आगे बढ़ना, बच निकलना –कृतोऽधियास्यसि क्रूर निहतस्तेन पत्रिभिः– भट्टि० ८।९०,
अनु–
1. अनुसरण करना, पीछे जाना (आलं० से भी) अनुयास्यन्मुनितनयां– श० १।२९, कु० ४।११, भट्टि २।७७
2. नकल करना, बराबर करना–स किलानुययुस्तस्य राजानो रक्षितुर्यशः–रघु० १।२७, ९।६, १२।३
3. साथ चलना,
अनुसम्–
क्रमशः चलना
अप–
चले जाना, बिदा होना. वापिस होना
अभि–
पहुँचना, जाना, नजदीक होना–अभिययौ स हिमाचलमुच्छ्रितम्–कि० ५।१, रघु० ९।२७
2. प्रयाण करना, आक्रमण करना–रघु० ५।३०
3. संलग्न करना,
आ–
1. आना, पहुँचना, निकट होना
2. पहुँचना, प्राप्त करना, भुगतना, किसी भी अवस्था में होना, क्षयं, तुलां, नाशम् आदि,
उप–
1. पहुँचना, निकट जाना–कि० ६।१६
2.. विशेष अवस्था को) प्राप्त होना–मृत्युं तनुताम्, रुजम् आदि,
निस्–
1. निकलना, बाहर जाना –रघु० १२।८३
2. गुजरना, (समय) बीतना,
परि–
चारों ओर घूमना चक्कर काटना, प्रदक्षिणा करना,
प्र–
1. चलना, जाना–त्रस्ताद्


या (अदा० पर०) बिदा करना ।

परिशिष्ट



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