संस्कृत-शब्दकोशः

य्वागुली रकसा

र

रः [रा+ड]


1. अग्नि
2. गर्मी
3. प्रेम, इच्छा
4. चाल, गति ।


रम् (भ्वा० आ० रमते, परन्तु वि, आ, परि उपसर्ग लगने पर पर०, रत)
1. प्रसन्न होना, खुश होना, हर्ष मनाना, तृप्त होना–रहसि रमते–मा० ३।२–मनु० २।२२३
2. हर्षित होना,–प्रसन्न होना, आनन्द मनाना, स्नेहशील होना (करण और अधि० के साथ) –लोलापाङ्गैर्यदि न रमसे लोचनैर्वञ्चितोऽसि –मेघ० २७, व्यजेष्ट षड्वर्गमरंस्त नीतौ –भट्टि० १।२
3. खेलना, क्रीडा करना, प्रेमालिङ्गन करना, जी बहलाना,–राजप्रियाः कैरविण्यो रमन्ते मधुपैः सह –भामि० १।१२६ (यहाँ दूसरा अर्थ भी संकेतित है) –भट्टि० ६।१५, ६७
4. संभोग करना–सा तत्पुत्रेण सह रमते –हि० ३
5 रहना, ठहरना, टिकना. प्रेर०–(रमयति–ते) प्रसन्न करना, खुश करना, सन्तुष्ट करना–इच्छा० (रिरंसते) क्रीडा करने की इच्छा करना–शि० १५।८८,
अभि–
हर्ष मनाना, प्रसन्न या आनन्दित होता, अत्यनुरक्त होना–भट्टि० १।७, भग० १८।४५,
आ–
(पर०)
1. आनन्द लेना, खुशी मनाना –भट्टि० ८।५२, ३।३८
2. ठहरना, थमना, छोड़ देना (बोलना आदि), समाप्त करना –मनु० २।७३,
उप–
(पर० और आ०)
1. रुकना, अन्त करना, समाप्त करना–सङ्गतावुपरराम च लज्जा–नि० ९।४४, १३।६९
2. रुकना, थमना –भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः–भग० २।३५, भट्टि० ८।५४, ५५, कि० ४।१७
3. चुप होना, शांत होना, भग० ६।२०,
4. मरना–दे० उपरत,
परि–
(पर०) प्रसन्न होना, खुश होना –भट्टि० ८।५३,
वि–
(पर०)
1. अन्त होना, समाप्त होना, अवसान होना –अविदितगतयामा रात्रिरेव व्यरंसीत्–उत्तर० १।२७
2. रुकना, बन्द होना थमना, छोड़ देना (बोलना आदि)–एतावदुक्त्वा विरते मृगेन्द्रे–रघु० २।५१, शि० २।१३, प्रायः अपा० के साथ, –हा हन्त किमिति चित्तं विरमति नाद्यापि विषयेभ्यः– भामि० ४।२५, उत्तर० १।३३,
सम्–
(आ०) प्रसन्न होना, हर्ष मनाना–भट्टि० १९।३० ।



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