संस्कृत-शब्दकोशः

रक्षिन् रघु

रक्ष्

रक्ष् (भ्वा० पर० रक्षति, रक्षित)
1. रक्षा करना, चौकीदारी करना, देखभाल करना, पहरा देना, (पशु आदि) पालना, राज्य करना, (पृथ्वी पर) शासन करना –भवानिमां प्रतिकृतिं रक्षतु –श० ६, ज्ञास्यसि कियद्भुजो मे रक्षति मौर्वीकिणांक इति –श० १।१३
2. सुरक्षित रखना, (भेद) न खोलना –हस्यं रक्षति
3. सन्धारण करना, बचाना, बचा कर रखना (बहुधा अपा० के साथ) अलब्धं चैव लिप्सेत लब्धं रक्षेदवक्षयात् –हि० २।८, आपदर्थे धनं रक्षेत् –हि० १।४१, रघु० २।५०, ११।७७
4. टालमटूल करना–मुद्रा० १।२, (अभि,परि, सम् आदि उपसर्ग जोड़ने पर इस धातु के अर्थों में कोई विशेष परिवर्तन नहीं होता) ।


रक्ष् (भ्वा० पर०) सावधान होना, जागरूक होना ।

परिशिष्ट



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