रच् ( चुरा० उभ० रचयति-ते ,रचित )
1. व्यवस्थित करना, सज्जित करना, तैयार करना, बना लेना, रचना करना–पुष्पाणां प्रकरः स्मितेन रचितो नो कुन्दजात्यादिभि:–अमरु ४०,रचयति शयन सचकितनयनम्–गीत ५
2. बनाना, रूप देना, कार्यान्वित करना, रचना करना पैदा करना–मायाविकल्परचितै: स्यंदनै:–रघु० १३।७५, माधुर्यं मधुबिंदुना रचयितुं क्षारांबुधेरीहते–भर्तृ० २।६. मौलो वा रचयांजलिम् – वेणी० ३।४०
3. लिखना, रचना करना, (किसी कृति आदि को) एकत्र करना–अश्वधाटीं जगन्नाथो विश्वहृद्यामरीरचत् –अश्व० २६, श० ३।१५
4. रखना, स्थिर करना, जमाना–रचयति चिकुरे कुरबककुसुमम्–गीत० ७, कु० ४।१८, ३४, श० ६।१७
5. अलंकृत करना, सजाना मेघ० ६६
6. (मन को) लगाना, –
आ–
व्यवस्थित करता.
वि–
1. व्यवस्थित करना
2. रचना करना
3. कार्यान्वित करना, पंदा करना, बनाना –मेघ० ९५, भामि० १।३० ।