रन्तिदेवः [रम्+तिक्=रन्तिश्चासौ देवश्च–कर्म० स०]
एक चन्द्रवंशी राजा, भरत के बाद छठी पीढ़ी में (यह अत्यन्त पुण्यात्मा और उदार व्यक्ति था, उसके पास अपार धनराशि थी जो इसने बड़े २ यज्ञों के अनुष्ठान में व्यय की । उसके राज्य में यज्ञ में बलि दिये गये तथा उसकी रसोई में उपयुक्त किये गये पशुओं की इतनी बड़ी संख्या थी कि उनकी खालों से रुधिर की नदी निकली मानी जाती है, इसी नदी का बाद में 'चर्मण्वती' नाम पड़ गया–तु० मेघ० ४५, और तदुपरि मल्लि॰) ।