रूक्ष (वि०) [रूक्ष् +अच्]
1. खुरदरा, कठोर, (स्पर्श या शब्द आदि) जो मृदु न हो, रूखा– रूक्षस्वरं वाशति वायसोऽयम् –मृच्छ ९।१०, कु० ७।१७
2. कसैला (स्वाद)
3. ऊबड़–खाबड़, असम, कठिन, कर्कश
4. दूषित, मलिन, मैला –रघु० ७।७०, मुद्रा० ४।५
5. क्रूर, निर्दय, कठोर – नितान्तरूक्षाभिनिवेशमीशम् – रघु० १४।४३, श० ७।३२, पंच० ४।९१
6. नीरस, भुना हुआ, सूखा, वीरान –स्निग्धश्यामाः क्वचिदपरतो भीषणाभोगरूक्षाः–उत्तर० २।१४, (‘रूक्षीकृ’–, ऊबड़–खाबड़ करना, मैला करना, मिट्टी लथेड़ना) ।
रूक्ष (वि०) [रूक्ष्+अच्]
1. कठोर, रूखा
2. तीखा,चटपटा
3. चिकनाई से रहित (जैसे भोजन)
~क्ष:
1. वृक्ष
2. कठोरता, रूखापन,
~क्षम्
1. दही की मोटी तह
2. काली मिर्च ।
समस्त पद
~भाष:
रूखा भाव, अमित्रत्व का रुझान,
~बालुकम्
मधु मक्खियों से प्राप्त शहद ।
परिशिष्ट