लङ्घ् (भ्वा० उभ० लङ्घति–ते, लङ्घित, इच्छा० लिलङ्घिषति–ते)
1. उछलना कूदना, छलांग लगाना
2. सवारी करना, चढ़ना– अन्ये चालङ्घिषुः शैलान् –भट्टि० १५।३२
3. परे चले जाना, अतिक्रमण करना –लङ्घते स्म मुनिरेष विमानिन् –नै० ५।४ उपवास करना, अनशन करना
5. सूखना, सूख जाना (पर०)
6. झपट्टा मारना, आक्रमण करना, खा जाना, क्षति पहुँचाना –पल्लवान् हरिणो लङ्घितुमागच्छति –मालवि० ४, प्रेर० या चुरा० उभ० (लङ्घयति –ते)
1. ऊपर से कूद जाना, छलांग लगा देना, परे जाना –सागरः प्लवगेन्द्रेण क्रमेणकेन लङ्घितः–महा०, मनु० ४।३८
2. तय कर लेना, चल कर पार कर लेना (दूरी आदि) –रघु० १।४७
3. सवारी करना, चढ़ना –रघु० ४।५२
4. उल्लंघन करना, अतिक्रमण करना, अवज्ञा करना –रघु० ९।९ याज्ञ० २।१८७
5. रुष्ट करना, अपमान करना, निरादर करना, उपेक्षा करना –
“हस्त इव भूतिमलिनो यथा यथा लंघयति खल: सुजनम् ।
दर्पणमिव तं कुरुते तथा ॥”
–तथा निर्मलच्छायम् –वास०
6. रोकना, विरोध करना, ठहराना, टालना, हटाना –भाग्यं न लङ्घयति कोऽपि विधिप्रणीतम् –सुभा०, मृच्छ० ६।२
7. आक्रमण करना, झपट्टा मारना, क्षतिग्रस्त करना, चोट पहुँचाना –रघु० ११।९२
8. आगे बढ़ जाना, पीछे छोड़ देना, अपेक्षाकृत अधिक चमकना, ग्रहणग्रस्त करना,–(यशः) जगत्प्रकाशं तदशेषमिज्यया भवद्गुरुर्लङ्घयितुं ममोद्यतः –रघु० ३।४८ १. उपवास करवाना
10. चमकना
11. बोलना,
अभि–
1. परे चले जाना, ऊपर से छलांग लगा देना
2. उल्लंघन करना, अतिक्रमण करना, अवज्ञा करना,
उद्–
1. पार जाना, पार कर लेना, परे चले जाना –शि० ७।७४
2. सवारी करना चढ़ना
3. उल्लंघन करना, अतिक्रमण करना– मुद्रा १।१०, शि० १२।५७,
वि–
1. पार जाना. उछलकर पार करना, यात्रा करना–निवेशयामास विलङ्घिताध्वा –रघु० ५।४२, १६।३२, शि० १२।२४
2. उल्लंघन करना; अतिक्रमण करना, बाहर कदम रखना, अवहेलना करना, उपेक्षा करना –गन्तुं प्रवृत्ते समयं विलङ्घ्य –कु ५।२५, रघु० ५।४८
3. औचित्य की सीमा का उल्लंघन करना –रघु० ९।७४
4. उठाना, चढ़ना, ऊपर जाना कि० ५।१, नै० ५।२
5. छोड देना, परित्याग करना एक ओर फेंक देना –मनोबबन्धान्यरसान् विलङ्घ्य सा –रघु० ३।४
6. आगे बढ़ जाना, पीछे छोड देना –इति कर्णोत्पलं प्रायस्तव दृष्ट्या विलङ्घ्यते –काव्या २।२२४
7. उपवास कराना ।