लटभ (वि०) [प्राकृत 'लडह' शब्द से संबद्ध, स्वयं 'लडह' शब्द भी इस 'लटभ' से ही बना प्रतीत होता है]
लावण्यमय, मनोहर, सुन्दर, आकर्षक, प्रिय,–अतिक्रान्तः कालो लटभललनाभोगसुलभः –भर्तृ० ३।३२, (यहाँ भाष्यकार 'लटभ' का अर्थ 'सलावण्य' करते हैं), तस्याः पादनखश्रेणिः शोभते लटभभ्रुवः –विक्रमांक० ८।६, बिल्हण ने इस शब्द को इसी पुस्तक में और तीन स्थानों पर प्रयुक्त किया है जहाँ इसका अर्थ 'तरुणी स्त्री' या 'सुन्दरी स्त्री' प्रतीत होता है –उदा० किं वा वर्णनया समस्तलटभालङ्कारतामेष्यति –८।८६, अनर्घ्यलावण्यनिधानभूमिर्न कस्य लोभं लटभा तनोति –९।६८ केशबन्धविभवैर्लटभानां पिण्डतामिव जगाम तमिस्रम् ११।१८ ।