लता [लत्+अच्+टाप्]
1. बेल, फैलने वाला पौधा –लताभावेन परिणतमस्या रूपम्–विक्रम० ४, लतेव संनद्धमनोज्ञपल्लवा– रघु० ३।७, (विशेष रूप से 'भुजा' 'भौं' 'बिजली' आदि अर्थों को प्रकट करने वाले शब्दों के साथ समास के अन्त में, सौन्दर्य, कोमलता तथा पतलेपन को प्रकट करने के लिए प्रयोग –भुजलता. बाहुलता, भ्रूलता, विद्युल्लता, इसी प्रकार खङ्ग°, अलक° आदि, तु०, कु० २।६४, मेघ० ४७, श० ३।१५, रघु० ९।४५)
2. शाखा
3. प्रियंगु लता
4. माधवी लता
5. कस्तूरी लता
6. हंटर या कोडे का सड़ाका
7. मोतियों की लड़ी
8. सुकुमार स्त्री ।
समस्त पद
~अन्तम्
फूल,
~अम्बुजम्
एक प्रकार की ककड़ी,
~अर्कः
हरा प्याज,
~अलकः
हाथी,
~आननः
नाचते समय हाथों की विशेष मुद्रा,
~उद्गमः
लता का ऊपर को चढ़ना,
~करः
नाचते समय हाथों की विशेष मुद्रा,
~कस्तूरिका, ~कस्तूरी
कस्तूरी की बेल,
~गृहः, –हम्
लतागृह, लताकुंज –कु० ४।४१,
~जिह्वः, ~रसनः
साँप,
~तरुः
1. साल का वृक्ष
2. संतरे का पेड़,
~पनसः
तरबूज,
~प्रतानः
लतातन्तु –रघु० २।८,
~भवनम्
लतागृह, लताकुंज,
~मणिः
मूँगा,
~मण्डपः
लताकुंज लतागृह,
~मृगः
बन्दर,
~यावकम्
अंकुर, अंखुवा,
~वलयः, –यम्
लताकुंज,
~वृक्षः
नारियल का पेड़,
~वेष्टः
एक प्रकार का रतिबंध, संभोग का प्रकार,
~वेष्टनम्, ~वेष्टितकम्
आलिङ्गन का प्रकार ।