संस्कृत-शब्दकोशः

लबण लब्धि

लब्ध

लब्ध (भू० क० कृ०) [लप्+क्त]


1. हाशिल किया, प्राप्त किया, अवाप्त
2. लिया, प्राप्तकिया
3. प्रत्यक्षज्ञान प्राप्त किया, बोध पाया
4. उपलब्ध किया (भाग आदि से), दे० लभ् –ब्धम् जो प्राप्त कर लिया गया, या सुरक्षित हो गया –लब्धं रक्षेदवक्षयात् हि० २।८, रघु० १९।३ ।
समस्त पद
~अन्तर
(वि०)
1. जिसने कोई अवसर प्राप्त कर लिया है
2. जिसकी कहीं पहुंच हो गई है या प्रवेश मिल गया है –रघु० १६।७,
~अवकाश, ~अवसर
(वि०)
1. जिसे किसी बात का अवसर मिल गया है
2. (कोई भी बात) जिसे (कार्य के लिए) क्षेत्र मिल गया है – लब्धावकाशा मे प्रार्थना – श० १
3. जिसने फुरसत प्राप्त करली है, जिसे अवकाश का समय मिल गया है, इसी प्रकार 'लब्धक्षण',
~आस्पद
(वि०) जिसने कहीं पैर जमा लिया है, या कोई पद प्राप्त कर लिया है – मावि० १।१७,
~उदय
(वि०)
1. जन्मलिया हुआ, उत्पन्न, उदित – लब्धोदया चांद्रमसीव लेखा – कु० १।२५
2. समृद्धिशाली, या उन्नत –स त्वत्तो लब्धोदयः 'उसकी उन्नति तुम्हारी बदौलत हुई,
~काम
(वि०) जिसे अभीष्ट पदार्थ मिल गये हैं
~कीर्ति
(वि०) विश्रुत, प्रसिद्ध विख्यात,
~चेतस्, ~संज्ञ
(वि०) जिसे होश आ गया है, जिसकी बेहोशी दूर हो गई है,
~जन्मन्
(वि०) उत्पन्न, पैदा,
~नामन्, ~शब्द
(वि०) विश्रुत, विख्यात,
~नाशः
प्राप्त की हुई वस्तु का नाश–लब्धनाशो यथामृत्युः,
~प्रशमनम्
1. प्राप्त की हुई वस्तु को सुरक्षापूर्वक रखना
2. सुपात्र को दान या धनसमर्पण –मनु० ७।५६ पर कुल्लू०,
~लक्ष, –क्ष्य
(वि०)
1. जिसने ठीक निशाने पर आघात किया है
2. अस्त्रप्रयोग में कुशल,
~वर्ण
(वि०) विद्वान्, बुद्धिमान् –चित्रं त्वदीये विषये समन्तात् सर्वेऽपि लोकाः किल लब्धवर्णाः –राजप्र०
2. प्रसिद्ध, विश्रुत, विख्यात –मृच्छ० ४।२६,
°भाज्
(वि०) विद्वानों का आदर करने वाला –कृच्छ्रलब्धमपि लब्धवर्णभाक् तं दिदेश मुनये सलक्ष्मणम् –रघु० ११।२,
~विद्य
(वि०) विद्वान् शिक्षित, बुद्धिमान्,
~सिद्धि
(वि०) जिसने अभीष्ट पदार्थ (सफलता) या पूर्णता प्राप्त कर ली है ।


लब्ध (वि०) [लभ्+क्त]


1. प्राप्त, अवाप्त
2. गृहीत
3. प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त, समझा गया
4. (भाग करने के फलस्वरूप) प्राप्त, उपलब्ध ।
समस्त पद
~अनुज्ञ
.(वि.) जिसने अनुमति प्राप्त कर ली है,
~तीर्थ
(वि०) जिसने अवसर से लाभ उठा लिया है,
~प्रतिष्ठ
(वि०) जिसने कीर्ति प्राप्त कर ली है, जिसने अपनी साख जमा ली है, सम्मानित,
~प्रसर
(वि०) स्वतंत्रतापूर्वक इधर–उधर घूमने वाला,
~प्रसाद
(वि०) अनुग्रह–प्राप्त, प्रिय,
~श्रुत
(वि०) विद्वान्,
~संज्ञ
(वि०) जिसने सुधबुध प्राप्त कर ली है, जो होश में आ गया है ।

परिशिष्ट



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