संस्कृत-शब्दकोशः

लभस लभ्य

लभ्

लभ् (भ्वा० आ० लभते, लब्ध)
1. हासिल करना, प्राप्त करना, उपलब्ध करना, अवाप्त करना– लभेत सिकतासु तैलमपि यत्नतः पीडयन् –भर्तृ० २।५, चिरा याथार्थ्यमलम्भि दिग्गजैः –शि० १।६४, रघु० ९।२९
2. रखना, अधिकार में लेना, कब्जे में होना
3. लेना, प्राप्त करना
4. पकड़ना, लेना, दबोचना – रघु० १।३
5. मालूम करना, मुकाबला होना –यत्किंचिल्लभते पथि
6 वसूल करना, उगाहना
7. जानना, सीखना, प्रत्यक्षज्ञान प्राप्त करना, समझना –भ्रमणं गमनादेव लभ्यते –भाषा० ६, सत्यमलभमान –मनु० ८।१६९ पर कुल्लू०
8. (किसी बात को करने के) योग्य होना ('तुमुन्' के साथ) –मर्तुमपि न लभ्यते, नाधर्मो लभ्यते कर्तुं लोके वैद्याधरे (संज्ञाशब्दों के साथ प्रयुक्त होकर 'लभ्' के अर्थों में तदनुकूल परिवर्तन हो जाता है, उदा० ‘गर्भंलभ्’ गर्भवती होना, गर्भ धारण करना, ‘पदं लभ्, आस्पदं लभ्’ पैर जमाना, प्रभाव रखना, दे० 'पद' के नीचे, ‘आन्तरं लभ्’ पग रखना, प्रविष्ट होना,–लेभेऽन्तरं चेतसि नोपदेशः –रघु० ६।६६, मन पर प्रभाव नहीं पड़ा, ‘चेतनां लभ्, संज्ञां लभ्’ होश में आना, ‘जन्म लभ्’ पैदा होना,–कि० ५।४३, ‘दर्शनं लभ्’ भेंट होना, साक्षात्कार होना, दर्शन करना ‘स्वास्थ्यं लभ्’ स्वस्थ होना, आराम में होना) –प्रेर० (लम्भयति-ते)
1. प्राप्त करवाना, लिवाना –कि० २।५८
2. देना, प्रदान करना, अर्पण करना–मोदकशरावं माणवकं लम्भय –विक्रम० ३
3. कष्ट उठाना
4. प्राप्त करना, लेना
5. मालूम करना, खोजना –इच्छा० (लिप्सते) प्राप्त करने की इच्छा करना, प्रबल लालसा रखना –अलब्धं चैव लिप्सेत –हि० २।८,
आ–
1. स्पर्श करना – गामालभ्यार्कमीक्ष्य वा –मनु० ५।८७, भट्टि० १४।९१
2. प्राप्त करना, हासिल करना, पहुँचना –येन श्यामं वपुरतितरां कान्तिमालप्स्यते ते –मेघ० १५ (पाठान्तर)
3. मार डालना, (यज्ञ में पशु का बलिदान करना–गर्दभं पशुमालभ्य –याज्ञ० ३।२८०,
उप–
1. जानना, समझना, देखना, प्रत्यक्ष ज्ञान प्राप्त करना –पंच० १।७६
2. निश्चय करना, मालूम करना –ब्रूहि यदुपलब्धम् –उत्तर० १, तत्त्वत एनामपलप्स्ये –श० १
3. हासिल करना, प्राप्त करना, अवाप्त करना, उपभोग करना, अनुभव प्राप्त करना – उपलब्धसुखस्तदा स्मरं वपुषा स्वेन नियोजयिष्यति –कु० ४।४२, विक्रम० २।१०, रघु० ८।८२, १०।२, १८।२१, मनु० ११।१७,
उपा–
1. कलंक लगाना, बुरा भला कहना, चुभती बात कहना, खरी खोटी सुनाना –पयोधरविस्तारयितृकमात्मनो यौवनमुपालभस्व मां किमुपालभसे –श० १, कु० ५।५८, रघु० ७।४४, शि० ९।६०,
प्रति–
1. वसूल करना, फिर से उपलब्ध करना
2. हासिल करना, प्राप्त करना,
विप्र–
1. ठगना, धोखा देना, आँख में धूल झोंकना
2. वसूल करना, फिर से प्राप्त करना
3. अपमान करना, अनादर करना,
सम्–
हासिल करना ।



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