लिम्प् (तुदा० उभ० लिम्पति–ते, लिप्त)
1. लीपना, पोतना सानना –लिम्पतीव तमोऽङ्गानि –मृच्छ० १।०४
2. ढक देना, विछा देना –शि० ३।४८
3. दाग लगाना, दूषित करना, मलिन करना, कलंकित करना, कलुषित करना –यः करोति स लिप्यते –पंच० ४।६४, न मां कर्माणि लिम्पन्ति –भग० ४।१४, १८।१७, मनु० १०।१०६
4. प्रज्वलित करना, सुलगाना –तस्यालिपत शोकाग्निः स्वान्तं काष्ठमिव ज्वलन् –भट्टि० ६।२२,
अनु–
लीपना, पोतना वपुरन्वलिप्त न बधू: –शि० ९।५१ १५
2. ढक देना, फैलाना, घेर लेना –रघु० १०।१०, श० ७।७,
अव–
लीपना, पोतना (कर्मवा०) फूल जाना घमंडी बनना, उन्नत होना,
आ–
1. लीपना पोतना –उत्तर० ३।३९, ऋतु० ६।१२
2. दूषित करना, दाग लगाना,
उप–
धब्बा लगाना, मलिन करना, –भग० १३।३२,
वि–
लीपना, पोतना, मलना, –कु० ५।७९, भट्टि० ३।२०, १५।६, शि० १६।६२ ।