वन्धः [वन्ध्+घञ्]
1. ग्रन्थि, बन्धन–यथा–आशाबन्ध)
2. वालों को बांधने की पट्टी, फीता–विक्रम० ४।१०, श० १।३०
3. शृंखला, वेड़ी
4. बेड़ी डालना, कारागार में डालना, जेल में बंद करना–मनु० ८।३१०
5. बोचना, पकड़ना, पकड़ लेना–गजबन्ध –रघु० १६।२
6. निर्माण, संरचना, व्यवस्थापन –सर्गबन्धो महाकाव्यम्–सा० द० ६
7. भावना, धारणा, विचारना–हे राजानस्त्यजत सुकविप्रेमबन्धे विरोधम्–विक्रमांक० १८।१०७,रघु० ६।८१
8. संयोग, मिलन, अन्तः सम्पर्क
9. जोड़ना, मिलाना, मिश्रण करना–रघु० १४।१३, अञ्जलिबन्ध आदि
10. पट्टी, तनी
11. सहमति, सांमनस्य
12. प्रकटीकरण, प्रदर्शन, निरूपण–रघु० १८।५२
13. बंधन, भवबंधन (विप० मुक्ति०–अर्थात् सांसारिक बंधनों से पूर्ण मोक्ष) बन्धं मोक्षं च या वेत्ति बुद्धिः सा पार्थ सात्त्विकी–भग० १८।३०, बन्धान्मुक्त्यै खलु मखमुखान् कुर्वते कर्मपाशान्–भामि० ४।२१, रघु० १३।५८, १८।७
14. फल, परिणाम
15. स्थिति, अंगविन्यास,–आसनबन्धधीरः–रघु० २।६ कु० ३।४५, ५९
16. मैथुन करते समय विशेष आसन, रतिबंध, (रतिमंजरी में इस प्रकार के १६ आसन बताये गये हैं, जब कि और लेखक ८४ तक बढ़ा देते हैं)
17. गोट, किनारी, रूप रेखा, ढांचा
18. किसी श्लोक का कोई विशिष्ट रूप उदा० खड्गबंध, पद्मबंध, मुरजबंध–काव्य० ९
19. स्नायु, कण्डरा
20. शरीर
21. अमानत, धरोहर ।
समस्त पद
~करणम्
बेड़ी डालना, कारागार में डालना,
~तन्त्रम्
पूरी सेना या चतुरंगिणी सेना अर्थात् गजारोही, अश्वारोही, रथारोही तथा पदाति,
~पारुष्यम्
अस्वाभाविक या कृत्रिम शब्दरचना,
~स्तम्भः
पशुओं को बांधने का खूंटा (उदा० हाथी आदि) ।