वरडः [वृ+अंडच्]
1. समुदाय, वर्ग
2. मुँह पर निकली फुंसी
3. वरामदा
4. घास का ढेर
5. झोला (यदिदानीमहं वरण्डलम्बुक इव दूरमुत्क्षिप्य पातितः –मृच्छ० में ‘वरण्डलंबुक’ शब्द का अर्थ सन्दिग्ध है, इसका अर्थ प्रतीत होता है 'ऊपर लटकती हुई या उभरी हुई दीवार' जो यदि और ऊपर उठाई गई तो उसका लुढना जाना निश्चित है; यही बात सूत्रधार के विषय में है जिसकी आशाएँ अत्यंत ऊंची उठी परन्तु केवल निराशा में परिणत होने के लिए) ।