संस्कृत-शब्दकोशः

वलिशी वलीक

वली

वली (स्त्री०) (बलि:–ली भी लिखा जाता है ) [वल्+इन्, पक्षे ङीष्]


1. (खाल पर) शिकन या झुर्री –वलिभिर्मुखमाक्रान्तम्
2. पेट के ऊपरी भाग मैं चमड़े पर पड़ी शिकन, झुर्री, सिकुड़न, (विशेष कर स्त्रियों के यह एक सौन्दर्य का चिह्न समझा जाता है) मध्येन सा वेदिविलग्नमध्या वलित्रयं चारु बभार बाला –कु० १।३९
3. छप्पर की छत की बंडेरी ।
समस्त पद
~भूत
(वि०) घूंघर वाला, घुंघराले बालों वाला –कुसुमोत्खचितान् वलीभृतश्चलयन् भृंगरुचस्तवालकान् –रघु० ८।५३,
~मुखः, ~वदनः
बंदर, मा० ९।३१ ।



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