संस्कृत-शब्दकोशः

ववर्जित वंशक

वंश

वश (वि०) [वश् कर्तरि अच् भावे अप् वा]


1. अधीन, प्रभावित, प्रभावगत, नियन्त्रणगत (प्रायः समास में) शोकवशः, मृत्युवशः आदि
2. आज्ञाकारी, विनीत, अनुवर्ती
3. विनम्र, वशीकृत
4. मुग्ध, आकृष्ट
5. जादू द्वारा वश में किया हुआ,
~शः, ~शम्
1. अभिलाषा, चाह, इच्छा
2. शक्ति, प्रभाव, नियन्त्रण, स्वामित्व, अधिकार, अधीनता, दीनता, स्ववशः 'अपने अधीन' स्वतन्त्र, परवशः 'दूसरों के प्रभाव में अनयत् प्रभुशक्तिसम्पदा वशमेको नृपतीननंतरान् –रघ०८।१९, ‘वशं नी, –आनी’ अधीन करना, वश में करना जीत लेना, ‘वशं गम्, –इ, –या’, अधीन होना, मार्ग से हट जाना, दब जाना, विनीत होना न शुचो वशं वशिनामुत्तम गन्तुमर्हसि–रघु०८।१०, ‘वशे कृ’ या ‘वशीकृ’ बस में करना, हावी होना, जीत लेना, मुग्ध करना, जादू से बस में करना, ‘वशात्’ (अपा०) क्रिया विशेषण के रूप में प्रयुक्त होकर ‘शक्ति के द्वारा’ 'प्रभाव के द्वारा' 'के कारण' 'प्रयोजन से' अर्थ प्रकट करता है, दैववशात्, वायुवशात्, कार्यवशात् आदि
3. पालतू, रहने वाला
4. जन्म,
~शः
वेश्याओं का वासस्थान, चकला ।
समस्त पद
~अनुज, ~वर्तिन्
(इसी प्रकार 'वशंगत’) (वि०) आज्ञाकारी, दूसरे की इच्छा का वशवर्ती, विनीत, अधीन (पुं०) सेवक,
~आढयकः
सूंस,
~क्रिया
जीतना, अधीन करना
~ग
(वि०) अधीन, आज्ञाकारी–भर्तृ० २।९४
(–गा)
आज्ञाकारिणी पत्नी ।


वंशः [वमति उद्गिरति वम्+श तस्य नेत्वम्]


1. बाँस–धनुर्वंशविशुद्धोऽपि निर्गुणः किं करिष्यति –हि० प्र० २३, वंशभवो गुणवानपि संगविशेषेण पूज्यते पुरुषः –भामि० १।८० (यहां 'वंश' का अर्थ 'कुल या परिवार' भी है) मेघ० ७९
2. जाति, परिवार, कुटुम्ब, परंपरा –स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम् –हि० २, क्व सूर्यप्रभवो वंश: –रघु० १।२, दे० वंशकरम्, वंशस्थिति आदि
3. लाठी
4. बांसुरी, मुरली, अलगोझा या विपंचीनाड –कूजद्भिरापादितवंशकृत्यं –रघु० २।१२
5. संग्रह, संघात, समुच्चय (प्रायः एक समान वस्तुओं का) –सान्द्रीकृतः स्यन्दनवंशचक्रै:– रघु० ७।३९
6. आर–पार, शहतीर
7. (बांस में) जोड़
8. एक प्रकार का ईख
9. रीढ़ की हड्डी
10. साल का वृक्ष
11. लम्बाई नापने का एक विशेष माप (दस हाथ के बराबर) ।
समस्त पद
~अङ्कम्, ~अङ्कुरः
1. बांस का किनारा
2. बांस का अंखुआ,
~अनुकीर्तनम्
वंशावली,
~अनुक्रमः
वंशावली,
~अनुचरितम्
एक परिवार या कुल का परिचय,
~आवली
वंशतालिका, वंशविवरण,
~आह्वः
बंसलोचन,
~कठिनः
बांसों का झुरमुट,
~कर
(वि०)
1. कुलप्रवर्तक
2. वंशस्थापक –रघु० १८।३१
(–रः)
मूलपुरुष,
~कर्पूररोचना, ~रोचना, ~लोचना
बंसलोचन, तवाशीर,
~कृत्
(पुं०) कुल संस्थापक, या वंशप्रवर्तक,
~क्रमः
वंशपरंपरा,
~क्षीरी
बंसलोचन,
~चरितम्
कुलपरिचय,
~चिन्तकः
वंशावली जानने वाला,
~छेत्तृ
(वि०) किसी कुल का अंतिम पुरुष,
~ज
(वि०)
1. कुल में उत्पन्न–रघु० १।३१
2. सत्कुलोद्भव
(–जः)
1. प्रजा, संतान, औलाद
2. बांस का बीज
(–जम्)
बंसलोचन,
~नर्तिन्
(पुं०) नट, मसखरा,
~नाडि(ली)का
बांस की बनाई बांसुरी,
~नाथः
किसी वंश का प्रधान पुरुष,
~नेत्रम्
ईख की जड़,
~पत्रम्
बांस का पत्ता
(–त्रः)
नरकुल,
~पत्रकः
1. नरकुल
2. पौंडा, गन्ने का श्वेत प्रकार,
(–कम्)
हरताल,
~परंपरा
वंशानुक्रम, कुलपरंपरा,
~पूरकम्
गन्ने की जड़,
~भोज्य
(वि०) आनुवंशिक,
(–ज्यम्)
आनुवंशिक भूसंपत्ति,
~लक्ष्मीः
(स्त्री०) कुल का सौभाग्य,
~विततिः
(स्त्री०)
1. परिवार, सन्तान
2. बांसों का झुरमुट,
~शर्करा
बंसलोचन,
~शलाका
वीणा में लगी बाँस की खूँटी,
~स्थितिः
(स्त्री०) कुल की अविच्छिन्नता –रघु० १८।३१ ।


वंशः [वम्+श]


1. संगीत का एक विशेष स्वर
2. बाँस
3. अहंकार, अभिमान
4. कुल ।
समस्त पद
~कर्मन्
वाँस की दस्तकारी,
~कृत्यम्
बंसरी बजाना,
~धरः
किसी कुल में उत्पन्न,
~पत्रपतितम्
सत्रह मात्राओं का एक छन्द,
~पात्रम्
बांस की बनी टोकरी,
~बाह्यः
कुल से निष्कासित,
~ब्राह्मणम्
सामवेद ब्राह्मण का मूल पाठ, लून (वि०) संसार में अकेला
~वनम्
बाँसों का जंगल,
~वर्धनः
पुत्र,
~विस्तरः
वंशावली
~स्थविलम्
एक छन्द का नाम ।

परिशिष्ट



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