वाच् (स्त्री०) [वच् +क्विप् दीर्घोऽसंप्रसारणं च]
1. वचन, शब्द, पदावली (विप० ‘अर्थ’) –वागर्थाविव सम्पृक्तौ वागर्थप्रतिपत्तये–रघु० १।१
2. वचन, बात, भाषा, वाणी–वाचि पुण्यापुण्यहेतवः–मा० ४, लौकिकानां हि साधूनामर्थं वागनुवर्तते, ऋषीणां पुनराद्यानां वाचमर्थोऽनुघावति –उत्तर० १।१०, विनिश्चितार्थामिति वाचमाददे–कि० १।१०, 'यह वचन कहे', 'निम्नांकित कहा' १४।२, रघु० १।५९, शि० २।१३, २३, कु० २।३
3. वाणी, शब्द–अशरीरिणी वागुदचरत्–उत्तर०२, मनुष्यवाचा–रघु० ३।५३
4. उक्ति, वक्तव्य
5. भरोसा, प्रतिज्ञा
6. पदोच्चय, कहावत, लोकोक्ति
7. विद्या की देवी सरस्वती ।
समस्त पद
~अर्थः
(वागर्थः) शब्द और उसका अर्थ–रघु० १।१, ऊ० दे०,
~आडम्बरः
(वागाडम्बरः) शब्दाडम्बर, वाग्जाल,
~आत्मन्
(वागात्मन्) (वि०) शब्दों से युक्त उत्तर० २,
~ईशः
(वागीशः)
1. सुवक्ता, वाक्पटु
2. देवताओं के गुरु बृहस्पति का विशेषण
3. ब्रह्मा का विशेषण–कु० २।३,
(–शा)
सरस्वती का नाम,
~ईश्वरः
(वागीश्वरः)
1. सुवक्ता, वाक्पटु
2. ब्रह्मा का विशेषण,
(–री)
वाणी की देवता सरस्वती देवी,
~ऋषभः
(वागृषभः) बोलने में प्रमुख, वाक्पटु या विद्वान् पुरुष,
~कलहः
(वाक्कलह) झगड़ा, उत्पात,
~कीरः
(वाक्कीरः) पत्नी का भाई,
~गुदः
(वाग्गुदः) एक प्रकार का पक्षी,
~गुलिः, ~गुलिकः
(वाग्गुलि आदि) राजा का पानदान–वाहक–तु० 'तांबूलकरंक वाहिन्',
~चपल
(वि०) (वाक्चपल) बकवात करने वाला, निरर्थक और असंगत बातें करने वाला,
~चापल्यम्
(वाक्चापल्यम्) निरर्थक बातें, बकवास, गपशप,
~छलम्
(वाक्छलम्) शब्दों के द्वारा बेईमानी, टालमटूल उत्तर, गोलमाल–मुद्रा० १,
~जालम्
(वाग्जालम्) शब्दाडंबरपूर्ण असार बातें शि० २।२७,
~डंबरः
(वाग्डंबरः)
1. निस्सार उक्ति
2, बड़े बोल,
~दंडः
(वाग्दंडः)
1. भर्त्सनापूर्ण वचन, डांट–फटकार, झिड़की
2. बोलने पर नियन्त्रण, शब्दों या वचनों पर रोक–तु० त्रिदंडः,
~दत्त
(वाग्दत्त) (वि०) प्रतिज्ञात, संबद्ध, जिसकी सगाई हो चुकी हो,
(–त्ता)
संबद्ध या सगाई हुई कन्या,
~दरिद्र
(वाग्दरिद्र) (वि०) वचनों में दरिद्र अर्थात् कम बोलने वाला,
~दलम्
(वाग्दलम्) ओष्ठ
~दानम्
(वाग्दानम्) सगाई,
~दुष्ट
(वाग्दुष्ट) (वि०)
1. गाली देने वाला, बदजबान, अश्लीलभाषी
2. व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध भाषा बोलने वाला,
(–ष्टः)
1. निन्दक
2. वह ब्राह्मण जिसका उपनयनसंस्कार ठीक समय पर न हुआ हो,
~देवता, ~देवी
(वाग्देवता, वाग्देवी) वाणी की देवता सरस्वती देवी वाग्देवताया: सांमुख्यमाधत्ते–सा०द० १,
~दोषः
(वाग्दोषः)
1. (अरुचिकर) शब्द का उच्चारण –बाग्दोषाद् ११५ गर्दभो हतः–हि०३
2. अपशब्द, मानहानि
3. व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध भाषण,
~निबंधन
(वाग्निबंधन) (वि०) वचनों पर आश्रित रहने वाला,
~निश्चयः
(वाङ्निश्चयः) मुंह के वचन से मंगनी, विवाह–संविदा
~निष्ठा
(वाङ्निष्ठा) (अपने वचनों या प्रतिज्ञा) के प्रति भक्ति या श्रद्धा,
~पटु
(वि०.) (वाक्पटु) बोलने में कुशल, वाक्चतुर,
~पति
(वि०) (वाक्पति) वाक्चतुर, अलंकारयुक्त,
(–तिः)
बृहस्पति का नाम (इस अर्थ में 'वाचसां पतिः' का भी प्रयोग होता है),
~पारुष्यम्
(वाक्पारुष्यम्)
1. भाषा की कर्कशता
2. शब्दों द्वारा अपमान, अपशब्दयुक्त भाषा, मानहानि,
~प्रचोदनम्
(वाक्प्रचोदनम्) वचनों में अभिव्यक्त किया गया आदेश,
~प्रतोदः
(वाक्प्रतोदः)वचनों द्वारा उकसाना, भडकाने वाली या उपालंभयुक्त भाषा,
~प्रलापः
(वाक्प्रलापः) वाग्मिता,
~बंधनम्
(वाग्बंधनम) भाषण बंद करना, चुप करना–अमरु० १३, –‘मनसे’ (द्वि० व०–वाङ्मनसी–वैदिक भाषा में) वाणी और मन,
~मात्रम्
(वाङ्मात्रम्) केवल वचन,
~मुखम्
(वाङ्मुखम्) किसी वक्तृता का आरंभ या प्रस्तावना, आमुख, भूमिका,
~यत
(वि०) (वाग्यत) जिसने अपनी वाणी को नियंत्रित कर लिया है. या दमन कर लिया है, मौनी,
~यमः
(वाग्यमः) जिसने अपनी बोली को नियंत्रित कर लिया है, मुनि, ऋषि,
~यामः
(वाग्यामः) मूक पुरुष,
~युद्धम्
(वाग्युद्धम् ) शब्दों की लड़ाई, गरमागरम वादविवाद या चर्चा, विवादास्पद विषय,
~वज्रः
(वाग्वज्रः)
1. कठोर (वज्रकी भांति) शब्द–अहह दारुणो वाग्वज़्रः–उत्तर०१
2. कठोर भाषा,
~विदग्ध
(वाग्विदग्धः) (वि०) बोलने में कुशल
(–ग्धा)
मधुरभाषिणी और मनोहारिणी,
~विभवः
(वाग्विभवः) शब्दों का भंडार, वर्णनशक्ति, भाषा पर आधिपत्य–भा० १।२६, रघु० १।९,
~विलासः
(वाग्विलास:) ललित या प्रांजल भाषा,
~व्यवहारः
(वाग्व्यवहारः) मौखिक विचारविमर्श–प्रयोगप्रधानं हि नाट्यशास्त्रं किमत्र वाग्व्यवहारेण मालवि० १,
~व्ययः
(वाग्व्ययः) शब्दों का ह्रास,
~व्यापारः
(वाग्व्यापार:)
1. बोलने की रीति
2. भाषणशैली या अभ्यास,
~संयमः
(वाक् संयमः) भाषण या बोलने पर नियंत्रण ।
वाच् (स्त्री०) [वच्+क्विप्, दीर्घः]
1. वाणी की देवता सरस्वती ।
समस्त पद
~अपेत
(वि०) गूँगा,
~आम्भ्रणी
1. सरस्वती के प्रसाद को प्राप्त कराने वाले ऋग् मन्त्रों का समूह
2. एक वैदिक ऋषि का नाम,
~उत्तरम्
वक्तव्य की समाप्ति या उपसंहार,
~केलि
~केली
बुद्धि की चतुराई के युक्त वार्तालाप,
~गुम्फः
कोरी बातचीत,
~जीवनः
विदूषक, ठिठोलिया,
~निमित्तम्
किसी उक्ति से प्रबोधन या चेतावनी–तच्चाकर्ण्य वाङ्निमित्तज्ञः पितरि सुतरां जीविताशां शिथिलीचकार –हर्ष० ५,
~पथः
वाणी का परास,
~पाटवम्
वाणी की चतुराई,
~पारीणः
अभिव्यक्ति के परास को पार कर जाने वाला व्यक्ति, वाणी में पारङ्गत,
~भटः
(वाग्भटः)
1. आयुर्वेद विषय का प्रसिद्ध लेखक
2. अलंकार शास्त्र का एक प्रणेता,
~विद्
(वि०) तर्क और युक्तियाँ देने में प्रवीण,
~विनिःसृत
उक्तियों के द्वारा प्रस्तुत,
~विस्तरः
वाग्विस्तार, वाक्प्रपंच, बहुभाषिता,
~सन्तक्षणम्
सोपालंभ उक्ति, व्यंग्यवाक्य,
~सङ्गः
शतरंजी वक्तृता, बहुविध भाषण,
~स्तब्ध
(वि०) जिसकी वाणी रुक गई है, जो बोल नहीं सकता ।
परिशिष्ट