वाराह (वि०) (स्त्री० –‘ही’) [वराह+अण्]
शूकर से सम्बद्ध, मद्रा० ८।१९, याज्ञ० १।२५९, ~हः1. शूकर2. एक प्रकार का वक्ष ।समस्त पद~कल्पः वर्तमान कल्प (जिसमें हम रह रहे हैं) का नाम, ~पुराणम् अठारह पुराणों में से एक ।