वारि (नपं०) [वृ+इञ्]
1.जल यथा खनन् खनि नण नरो वार्यधिगच्छति सुभा०
2. तरल पदार्थ एक प्रकार का सुगंध द्रव्य, ह्रीवेर,
~रिः, ~री
(स्त्री०)
1. हाथी को बांधने का तस्मा – वारी धारैः सस्मरे वारणानाम् –शि० १८।५६, रघु० ५।४५
2. हाथो को बांधने का रस्सा
3. हाथियों को पकड़ने का गड्ढा या पिंजरा
4. बंदी, कैदी
5. जलपात्र
6. सरस्वती का नाम ।
समस्त पद
~ईशः
समुद्र,
~उद्भवम्
कमल,
~ओक:
जोक,
~कर्पूरः
एक प्रकार की मछली, इलीश,
~कुब्जकः
सिंघाड़ा, शृंगाटक का पौधा
~क्रिमीः
जोंक,
~चत्वरः
जलाशय,
~चर
(वि०) जलचर
(–रः)
1. मछली
2. कोई जलजन्तु
~ज
(वि०) जल में उत्पन्न,
(–जः)
1. कमल–शि० १५।७२
2. कोई भी द्विकोषीय
(–जम्)
1. कमल–शि० ४।६६
2. एक प्रकार का नमक
3. एक प्रकार का पौधा, गौरसुवर्ण
4. लौंग,
~तस्करः
बादल,
~त्रा
छतरी,
~दः
बादल –वितर वारिद वारि दवातुरे–सुभा०, भामि०१।३०,
(–दम्)
एक प्रकार का गन्धद्रव्य,
~द्रः
चातक पक्षी,
~धरः
बादल–नववारिधरोदयादहोभिर्भवितव्यं च निरातपत्वरम्यैः–विक्रम० ४।३,
~धारा
बृष्टि की बौछार,
~धिः
समुद्र–वारिधिसुतामक्ष्णां दिदृक्षुः शतैः –गीत० १२,
~नाथः
1. समुद्र
2. वरुण का विशेषण
3. बादल,
~निधिः
समुद्र,
~पथः, –थम्
'समुद्र यात्रा' जलयात्रा,
~प्रवाहः
झरना, जलप्रताप,
~मसिः, ~मुच्, –रः
बादल,
~यंत्रम्
जलघटिका, रहट । मालवि० २।१३,
~रथः
डोंगी, नाव, घड़नई,
~राशिः
1. समद्र सरोवर,
~रुहम्
कमल,
~वासः
कलाल, शराब बेचने वाला,
~वाहः, ~वाहनः
बादल,
~शः
विष्णु का नाम,
~संभवः
1. लौंग
2. अंजनविशेष
3. खस की सुगन्धित जड़, उशीर ।
वारि (नपुं०)[वृ+इञ]
1. पानी
2. तरल या पिघला हुआ या बहने वाला पदार्थ ।
समस्त पद
~कूटः
गाँव के चारों ओर की खाई, परिखा,
~पिण्डः
चट्टान का मेंढक,
~भवः
शंख,
~साम्यम्
दूध ।
परिशिष्ट