संस्कृत-शब्दकोशः

वाल्कल वाल्मीकि

वाल्मीक

वाल्मीकः [वल्मीके भवः अण् इञ् वा]


एक विख्यात मुनि तथा रामायण के प्रणेता का नाम (जन्म से यह ब्राह्मण था, परन्तु बचपन में मातापिता द्वारा परित्यक्त होने पर यह कुछ बर्वर पहाड़ियों को मिल गया जिन्होंने इसे चोरी करना सिखलाया । यह शीघ्र ही चौर्य कला में प्रवीण हो गया और कुछ वर्षों तक बटोहियों को मारने और लूटने का कार्य करता रहा । एक दिन उसे एक महामुनि मिला जिसको इसने मार डालने का भय दिखा कर कहा कि जो कुछ पास है सब निकाल कर रख दो । परन्तु मुनि ने इसे कहा कि पहले घर जाकर अपनी पत्नी और बच्चों को पूछो कि क्या वह लोग तुम्हारे इस अनन्त अत्याचार व लूटमार के जो तुम अब तक करते रहे हो. साझीदार है । वह तुरन्त घर गया परन्तु उनकी अनिच्छा को जानकर बड़ा उद्विग्न हुआ । तब मुनि ने उसे 'मरा' 'मरा' (जो 'राम' प्रतीप है) उच्चारण करने के लिए कहा और अन्तर्धान हो गया । यह लुटेरा इस शब्द का वर्षों जप करता रहा, यहां तक कि उसका शरीर दीमको द्वारा लाई गई मिट्टी से ढक गया । वही मुनि फिर आया और उसने इसे बांबी से निकाला, वल्मीक (बांबी) से निकलने के कारण इसका नाम वाल्मीकि पड़ गया । यही बाद में बड़ा प्रसिद्ध मुनि हुआ । एक दिन जब कि वह स्नान कर रहा था, उसन क्रौंच पक्षी के जोड़े में से एक को बहेलिये द्वारा मरते हुए देख, इस पर इस ऋषि के मुख से उस दुष्ट बहेलिये के लिए अनजान में कुछ अभिशाप के शब्द निकल गये जिन्होंने अनुष्टुप् छन्द में इलोक का रूप धारण किया । रचना की यह नई शैली थी । ब्रह्मा के आदेश से इसने 'रामायण' नामक प्रथम काव्य की रचना की । जब राम ने सीता का परित्याग कर दिया तो इस ऋषि ने सीता को अपने आश्रम में शरण दी, उसके दोनों पुत्रों का पालन पोषण किया, उन्हें शिक्षा दी । बाद में इसने इनको राम के सुपुर्द कर दिया ।



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