संस्कृत-शब्दकोशः

विजोली विज्जन

विज्

विज्
i (जुहो० उभ० वेवेक्ति, वेविक्ते, विक्त)
1. वियुक्त करना, विभक्त करना
2. भेद करना, अन्तर पहचानना, विवेचन करना (प्रायः वि पूर्वक, तथा विपूर्वक विच् के समान) ।
ii (तुदा० आ०, रुधा० पर० विजते, विनक्ति, विग्न)
1. हिलना, कांपना
2. बिक्षुब्ध होना, भय से कांपना
3. डरना, भयभीत होना–चक्रंद विग्ना कुररीव भूयः–रघु० १४।६८
4. दुखी होना, कष्टग्रस्त होना, प्रेर० – (वेजयति-ते) त्रास देना, डराना,
आ–
डरना,
उद्–
भयभीत होना, डरना (प्रायः अपा० के साथ, कभी कभी संबं० के साथ)–तीक्ष्णदुद्विजते – मुद्रा० ३।५, यस्मान्नोद्विजते लोको लोकान्नोद्विजते च यः – भग० १२।५, भट्टि० ७।९२ खिन्न या कष्टग्रस्त होना, दुःखी होना – न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत् प्राप्य चाप्रियम् –भग० ५।२०
3.ऊबना (अपा० के साथ) जीविताद्विजमानेन – मा० ३,
“मनो नोद्विजते तस्य दहतोऽर्थमहर्निशम् ।
उद्विनक्ति तु संसारादसारात्तत्त्ववेदिनः ॥”
–कवि०
4. डराना, कष्ट देना, (प्रेर०) –
1. कष्ट देना, तंग करना–कु० १।५, ११
2. डराना ।



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