विज्जिका एक कवयित्री का नाम – “नीलोत्पलदलश्यामां विज्जिकां मामजानता ।वृथैव दण्डिना प्रोक्ता सर्वशुक्ला सरस्वती ॥” (उस कवयित्री का अब तक यही एक श्लोक उपलब्ध हुआ है) ।
परिशिष्ट