विद् (अदा० पर० वेत्ति या वेद, विदित, इच्छा० विविदिषति)
1. जानना, समझना, सीखना, मालूम करना, निश्चय करना, ख़ोजना –अवैल्लवणतोयस्य स्थिता दक्षिणतः कथम्–भट्टि० ८।१०६, तं मोहांधः कथमय ममुं वेत्तु देवं पुराणम् – वेणी० १।२३, ३।३९, श० ५।२७, भग० ४३५, १८।१
2. महसूस करना, अनुभव करना– मुद्रा० ३।४
3. मुंह ताकना, सम्मान करना, मानना, जाना, समझना विद्धि व्याधिव्याल ग्रस्तं लोकं शोकहतं च समस्तम् –मोह० ५, भग० २।१७, रघु० ३।३९, मनु० १।३३, कु० ६।३०, प्रेर० – (वेदयति–ते)
1. जतलाना, सूचना देना, सूचित करना, अवगत कराना, बताना
2. अध्यापन करना, व्याख्या करना,–वेदार्थंस्वानवेदयत्–सिद्धा०
3. महसूस करना, अनुभव करना–मनु० १२।१३,
आ–
(प्रेर०)
1. घोषणा करना, कहना, प्रकथन करना–किमिति नावेदयति अथवा किमावेदितेनवेणी० १, रघु० १२।५५, कु० ६।२१, भट्टि० ३।४९
2. प्रदर्शन करना, दिखाना इंगित करना आवेदयंति प्रत्यासन्नमानंदमग्रजातानि शुभानि निमित्तानि–का०
3. प्रस्तुत करना, देना,
नि–
(प्रेर०)
1. बताना, समाचार देना, सूचित करना (संप्र० के साथ)–रघु० श६८2. अपनी उपस्थिति की घोषणा करना–कथमात्मानं निवेदयामि–श०१3. इंगित करना, दिखलाना दिगंबरत्वेन निवेदितं वसु–कु० ५।७२
4. प्रस्तुत करना, उपस्थित होना, भेंट चढ़ाना–मनु० २।५१, याज्ञ० १।२७
5. देख रेख में सौंपना, दे देना,
प्रति–
(प्रेर०) समाचार देना सूचित करना,
सम्–
(आ०) जानना, सावधान होना–भट्टि० ५।३७. ८1१७
2. पहचानना, (प्रेर०) जतलाना, प्रत्यक्ष ज्ञान कराना–भट्टि० १७।६३।।
ii (दिवा० आ० विद्यते, वित्त) होना, विद्यमान होना –अपापानां कुले जाते मयि पापं न विद्यते –मृच्छ० ९।३७, नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः –भग० २।१६ (तु० 'अस्') ।
iii (तुदा० उभ० विंदति–ते, वित्त)
1. हासिल करना प्राप्त करना, अवाप्त करना, उपलब्ध करना–एकमप्यास्थितः सम्यगुभयोविंदते फलम्–भग० ५।४, याज्ञ० ३।१९२
2. मालूम करना, खोजना, पहचानना, यथा धेनुसहस्रेषु वत्सो विंदति मातरम्–सुभा०, कु० १।६, मनु० ८।१०९
3. महसूस करना, अनुभव करना–रघु० १४।५६, भग० ५।२१, ११।२४, १८।
४५
4. विवाह करना–मनु० ९।६९,
अनु–
1. हासिल करना, प्राप्त करना
2. भुगतना, अनुभव करना, महसूस करना–पांथ मंदमते किं वा संतापमन विंदसि –भामि० २।११२, गीत०४।
iv (रुधा० आ० वित्ते, वित्त या विन्न)
1. जानना, समझना
2. मानना, लिहाज करना, समझना–न तृणेह्नीति लोकोऽयं वित्ते मां निष्पराक्रमम्–भट्टि० ६।३९
3. मालूम करना, भेंट होना
4. तर्क करना, विमर्श करना
5. परीक्षण करना, पूछताछ करना ।
v (चरा० आ० वेदयते)
1. कहना, प्रकथन करना, घोषणा करना, समाचार देना
2. महसूस करना, अनुभव करना
3. रहना (निम्नांकित श्लोक में धातु के विभिन्न रूपों का उल्लेख है –
“वेत्ति सर्वाणि शास्त्राणि गर्वस्तस्य न विद्यते ।
वित्ते धर्मं सदा सद्भिस्तेषु पूजां च विंदति ॥”
) ।
विद् (भ्वा० पर० बिंदति)
1. खण्ड खण्ड करना
2. बाँटना ।
विद् (वि०) [विंद्+क्विप्]
(समास के अन्त में) जानने वाला, जानकार; वेदविद् आदि, (पुं०)
1. बुधग्रह
2. विद्वान् पुरुष, बुद्धिमान् मनुष्य– (स्त्री०)
1. ज्ञान
2. समझ, बुद्धि ।