विनय (वि०) [वि+ नी+अक्]
1. डाला हुआ, हुआ
2. गुप्त
3. अशिष्टाचारी,
~यः
1. निर्देश, अनु शासन, अनुदेश (अपने कर्तव्यक्षेत्र में) नैतिक प्रशिक्षण – रघु० १।२४, मा० १०।५
2. औचित्य, शिष्टाचार सुशीलता–श० १।२९
3. शिष्ट आचरण, सज्जनोचित व्यवहार, सच्चरित्र, अच्छा चलन–रघु०६।७९, मा० १।१८
4. शालीनता, विनम्रता–सुष्ठु शोभसे आर्यपुत्र एतेन विनयमाहात्म्येन–उत्तर० १, विद्या ददाति विनयम्; तथापि नीचैर्विनयाददृश्यत– रघु ३।३४, १०।७१, (यहां मल्लि ‘विनय' शब्द का अर्थ 'इन्द्रियजय' बतलाता है जो हमारे मतानुसार अनावश्यक है)
5. श्रद्धा, शिष्टता, सौजन्य
6. सदाचरण
7. खींच लेना, दूर करना, हटाना–शि० १०।४२
8. जिसने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है –जितेन्द्रिय
9. व्यापारी, सौदागर ।
समस्त पद
~अवनत
(वि०) झुका हुआ, विनम्र,
~ग्राहिन्
(वि०) शासनीय, आज्ञाकारी अनुवर्ती,
~वाच्
(वि०) मृदुभाषी, मिलनसार,
~स्थ
(वि०) विनयशील, शालीन ।
विनय: [वि+नी+अप्]
1. दण्ड – शीलवृत्तमविज्ञाय घास्यामि विनयं परम् महा० ३।३०६।१९
2. कार्यालय ।
परिशिष्ट