विपर्ययः [वि+परि+इ+अच्]
1. वैपरीत्य, व्यतिक्रम, औंधापन–आहितो जयविपर्ययोऽपि मे श्लाघ्य एंव परमेष्ठिना त्वया–रघु० ११।८६, ८।८९, नभस: स्फुटतारस्य रात्रेरिव विपर्ययः (न भाजनम्) कि० ११।४४, विपर्यये तु–श० ५, 'यदि अन्यथा हुआ' ‘यदि इसके विपरीत हुआ'
2. (अभिप्राय, वेश आदि बदलना–कथमेत्य मतिर्विपर्ययं करिणी पंकमिवावसीदति–कि० २।६, इसी प्रकार 'वेषविपर्ययः'–पंच० १
3. अभाव, अनस्तित्व–समद्रगारूपविपर्ययेऽपि –कु० ७।४२, त्यागे श्लाघाविपर्यय:– रघु० १।२२
4. लोप, हानि – निद्रा संज्ञाविपर्ययः – कु० ६।४४, 'सुधबुध न रहना'
5. पूर्ण विनाश, ध्वंस
6. विनिमय, अदल बदल
7. त्रुटि, उल्लंघन, भूल, कुछ का कुछ समझना
8. संकट, दुर्भाग्य, उलटा भाग्य
9. शत्रुता, दुश्मनी ।
विपर्ययः [वि+परि+इ+अच्]
मिथ्याबोध, गलतफ़हमी –ईशादपेतस्य विपर्ययोऽस्मृतिः –भाग० ११।२ ।३७।
परिशिष्ट