संस्कृत-शब्दकोशः

वियोग वियोगिन्

वियोगिनी

वियोगिनी (वैतालीय या सुन्दरी), परि०- विषमे ससजा गुरुः समे सभरा लोऽथ गुरु वियोगिनी ।
गण०- स, स, ज, ग (विषम चरण) स, भ, र, ल, ग (सम चरण) ।
उदा०-
“सहसा विदधीत न क्रियामविवेकः परमापदां पदम्।
वृणते हि विमृश्यकारिणम् गुणलुब्धाः स्वयमेव संपदः ॥”
कि० २।३०।


वियोगिनी [वियोगिन् + ङीष्]


1. अपने पति या प्रेमी से वियुक्त स्त्री, –गुरुनिःश्वसितैः कविर्मनिषी निरणैषीदथ तां वियोगिनीति –भामि० ४।३५
2.एक छन्द या वृत्तका नाम (दे० परि० १)



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