संस्कृत-शब्दकोशः

विरचित विरजस्

विरज

विरज (वि०) [विगतं रजो यस्मात्–प्रा० ब०]


जिस पर धूल या गर्द न हो, जिसमें राग न हो,
~जः
विष्णु का विशेषण ।



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