संस्कृत-शब्दकोशः

विराणिन् विराद्ध

विरात्र

विरात्र: [प्रा० ब०]


रात का तीसरा पहर –शुश्राव ब्रह्मघोषांश्च विराय ब्रह्मरक्षसाम् –रा० ५।२६।

परिशिष्ट


विरात्रम् [प्रा० ब०]


रात का तीसरा पहर –शुश्राव ब्रह्मघोषांश्च विराय ब्रह्मरक्षसाम् –रा० ५।२६।

परिशिष्ट



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