विरात्र: [प्रा० ब०]
रात का तीसरा पहर –शुश्राव ब्रह्मघोषांश्च विराय ब्रह्मरक्षसाम् –रा० ५।२६।
परिशिष्ट
विरात्रम् [प्रा० ब०]