विवर्तः [वि + वृत्+घञ्]
1. गोल चक्कर खाना, चारों ओर घूमना, भंवर
2. आगे को लुढ़कना
3. पीछे को लुढ़कना, लौटना
4. नृत्य
5. बदलना, सुधारना, रूप में परिवर्तन, बदली हुई दशा या अवस्था –शब्दब्रह्मणस्तादृशं विवर्तमितिहासं रामायणं प्रणिनाय –उत्तर० २, एको रसः करुण एव निमित्तभेदाद्भिन्नः पृथक् पृथगिवाश्रयते विवर्तान् –उत्तर० ३।४७, महावी० ५।५७
6. (वेदान्त० में) एक प्रतीयमान भ्रान्तिजनक रूप, अविद्या या मानव की भ्रांति से उत्पन्न मिथ्या रूप, (यह वेदान्तियों का एक प्रिय सिद्धांत है जिनके अनुसार यह समस्त संसार एक माया है मिथ्या और भ्रान्तिजनक रूप जब कि ब्रह्म या परमात्मा ही वास्तविक रूप है; जैसे कि सांप, रस्सी का विवर्त है, इसी प्रकार यह संसार उस पर ब्रह्म का विवर्त है, यह भ्रान्ति या माया सत्य ज्ञान अथवा विद्या से ही दूर होती है, तु० भवभूति –विद्याकल्पेन मरुता मेघानां भूयसामपि, ब्रह्मणीव विवर्तानां क्वापि विप्रलयः कृतः –उत्तर० ६।६
7. ढेर, समुच्चय, संग्रह समवाय ।
समस्त पद
~वादः
वेदान्तियों का सिद्धांत कि यह दृश्यमान संसार माया है केवल ब्रह्म ही एक वास्तविकता है ।