विवारः [वि+वृ+घञ्]
1. मुँह, विस्तार2. अक्षरों का उच्चारण करते समय कण्ठ का विस्तार (एक अभ्यंतर प्रयत्न, विप० संवार, दे० पा० १।१।९ पर सिद्धा०) ।