विश्रित (वि०)[वि+श्रि+अच्, क्त वा]
मिला हुआ, सम्पृक्त, गड्डमड्ड किया हुआ (करण० के साथ या समास में)–पुंभिर्विमिश्रा नार्यश्च–महा०, दंपत्योरिह को न को न तमसि व्रीडाविमिश्रो रसः– गीत० ५।