विषम् [विष्+क]
1. जहर, हलाहल (इस अर्थ में ‘पुं०’ भी कहा जाता है) – विषं भवतु मा भूद्वा फटाटोपो भयङ्कर: –पंच० १।२०४
2. जल, –विषं जलघरैः पीतं मूर्छिता: पथिकाङ्गनाः– चन्द्रा० ५।८२, (यहाँ दोनों अर्थ अभिप्रेत है)
3. कमलडण्डी के तन्तु या रेशे
4. लोबान, एक सुगन्धित द्रव्य का गोंद, रसगन्ध ।
समस्त पद
~अक्त, ~दिग्ध
(वि०) विषैला, जहरीला
~अंकुरः
1. बर्छी
2. विष में वुझा तीर,
~अंतक
शिव का विशेषण,
~अपह, ~घ्न
वि०) विषनाशक विषनिवारक औषधि,
~आननः, ~आयुधः, ~आस्यः
साँप,
~आस्वाद
(वि०) जहर चखने वाला,
~कुम्भ
जहर से भरा हुआ घड़ा,
~कृमिः
जहर में पला हुआ कीड़ा,
°न्याय
दे० न्याय के अन्तर्गत,
~ज्वरः
भैंसा
~दः
बादल
(–दम्)
तूतिया,
~दन्तकः
साँप,
~दर्शनमृत्युकः, ~मृत्युः
एक पक्षी (इसे चकोर कहते हैं).
~धरः
साँप –भामि० १।७४,
°निलयः
निम्नतर प्रदेश, साँपों का बिल,
~पुष्पम्
नील कमल,
~प्रयोगः
जहर का इस्तेमाल, जहर देना,
~भिषज्, ~वैद्य
विषनाशक औषधियों का विक्रेता, साँपों के काटने की चिकित्सा करने वाला –संप्रति विषवैद्यानां कर्म –मालवि० ४,
~मन्त्रः
1. सपि के काटे का विष उतारने का मन्त्र
2. सपेरा, बाजीगर,
~वृक्षः
जहरीला पेड़, –विषवृक्षोऽपि संवर्ध्य स्वयं छेत्तुमसाम्प्रतम्
~कु०
२।५५,
°न्याय
न्याय के नीचे देखो,
~वेगः
जहर का संचार या प्रभाव,
~शालूकः
कमल की जड़,
~शूकः, ~शृङ्गिन्, ~सृक्कन्
(पुं० ) भिड़, बर्र,
~हृदय
(वि०) विषाक्त दिलवाला अर्थात् दुष्टहृदय, मलिनात्मा ।