विषल
विषा
विषह्य
विषह्य (वि०) [वि+सह्+यत्]
1. सहन करने के योग्य, जो बर्दाश्त किया जा सके –अविषह्यव्यसनेन धूमिताम् –कु० ४।३०, रघु० ६।४७
2. जो बसाया जा सके जो निर्धारित किया जा सके –मनु० ८।२६५, संभव, शक्य ।
विषह्य (वि.) [वि+सह+यत्]
जीतने के योग्य ।
परिशिष्ट