संस्कृत-शब्दकोशः

विष्कन्द विष्कम्भक

विष्कम्भ

विष्कम्भः [वि+स्कंभ् +अच्]


1. अवरोध, रुकावट, बाधा
2. दरवाजे की सांकल, चटकनी
3. घर में लगा शहतीर
4. थूणी, खंभ
5. वृक्ष
6. (नाटकों में) नाटकों के अंकों के मध्य में मध्यरंग का दृश्य जो दो मध्यम या निम्नदर्जे के पात्रों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है, तथा जिसमें श्रोताओं के सामने अंकों के अन्तराल में तथा बाद में होने वाली घटनाओं को संक्षेप में कह कर नाटक की कथावस्तु के अवान्तर भागों का नाटक की मुख्य कथा से संबन्ध स्थापित कर दिया जाता है । साहित्यदर्पण में इसकी निम्नांकित परिभाषा दी गई है –
“वृत्तवर्तिष्यमाणानां कथांशानां निदर्शकः ।
संक्षिप्तार्थस्तु विष्कंभः आदावंकस्य दर्शितः ।
मध्येन मध्यमाभ्यां वा पात्राभ्यां संप्रयोजितः ।
शुद्धः स्यात् स तु संकीर्णो नीचमध्यमकल्पितः ॥”
–३०८
7. वृत्त का व्यास
8. योगियों की विशेष मुद्रा
9. विस्तार, लम्बाई ।



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