वृ (क्र्या० उभ० वृणाति, वृणीते, वूर्ण, कर्मवा० वूर्यते, इच्छा० वुवूर्षति–ते, विवरिषति–ते) छांटना, चुनना (दे० 'वृ'
1) ।
वृ
i (भ्वा०, स्वा०, क्र्या० उभ० वरति-ते, वृणोति-वृणुते, वृणाति-वृणीते, वृत, कर्मवा० व्रियते)
1.छांटना, चुनना, पसन्द करना –वृतं तेनेदमेव प्राक् –कु० २।५६, ववार रामस्य वनप्रयाणम् –भट्टि० ३।६
2. अपने लिए चुनना (आ०) वृणते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धाः स्वयमेव सम्पदः –कि० २।३०, रघु० ३।६
3. विवाह के लिए वरण करना, प्रणय–प्रार्थना करना, प्रणययाचना करना –महावी० १।२८, अनर्घ० ३।४२
4. प्रार्थना करना, निवेदन करना, याचना करना
5. ढकना, छिपाना गुप्त रखना, परदा डालना, लपेटना –मेधैर्वृतश्चन्द्रमाः –मृच्छ० ५।१४
6. घेरना, लपेटना –भट्टि० ५।१०, रघु० १२।६१
7. परे हटना, दूर करना, नियंत्रण करना, रोकना
8. विघ्न डालना, विरोध करना, अड़चन डालना, प्रेर०–(वारयति-ते)
1. ढकना, छिपाना
2. (किसी वस्तु से) आँख फेर लेना (अपा० के साथ)
3. रोकना, हटाना, नियंत्रण करना, दबाना, जांच पड़ताल करना, विघ्न डालना –शक्यो वारयितुं जलेन हुतभुक् –भर्तृ० २।११, इच्छा० वुवूर्षति–ते, विविरिषति–ते, विवरिषति–ते, चुनने की इच्छा करना,
अप–
खोलना (प्रेर०) ढकना, छिपाना
अपा–
खोलना
आ–
1. ढकना, छिपाना, गुप्त रखना –आवृणोदात्मनो रन्ध्रं रन्ध्रेषु प्रहरन् रिपून् –रघु०१७।६१, भट्टि० ९।२४
2. पूरना, व्याप्त होना –भग० १३।१३, मनु० २।१४४
3. चुनना, इच्छा करना
4. निवेदन करना, प्रार्थना करना
5. घेरना, नाके बंदी करना, रोकना –रघु० ७।३१
6. दूर रखना –भट्टि० १४।१०९,
नि–
घेरा डालना, घेरना –भट्टि० १४।१९, (प्रेर०)–परे हटना दूर करना, आँखें फेरना (अपा० के साथ) –पापान्निवारयति योजयते हिताय –भर्तृ० २।७२,
निस्–
(बहुधा क्तांत रूप) प्रसन्न होना, संतुष्ट या संतृप्त होना –निर्ववार मधुनींद्रियवर्ग: –शि० १०।३, दे० निर्वत,
परि–
घेरना,
प्र–
1. ढाकना, लपेटना –प्रावारिषुरिव क्षोणीं क्षिप्ता वृक्षाः समन्ततः –भट्टि० ९।२५
2. पहनना, धारण करना
3. चुनना, छाटना,
प्रा–
पहनना, धारण करना,
वि–
1. ढक देना, ठहरना
2. खोलना –कु० ४।२६
3. तह खोलना, भंडाफोड़ करना, भेद खोलना, प्रकट करना, प्रदर्शन करना –नै० ९।१, कु० ३।१५, रघु० ६।८५, भट्टि० ७।७३
4. सिखाना, व्याख्या करना, स्पष्ट करना –महावी० २।४३
5. फैलाना, भामि० १।५
6. चुनना
विनि–
(प्रेर०) रोकना, दूर हटाना, दबाना –विनयं विनिवार्य –मा० १।१८
सम्–
1.छिपाना, ढकना, प्रच्छन्न करना –मुहुरङ्गुलिसंवृताधरोष्ठम् –श० ३।१५, २।१०, रघु० १।२०, ७।३०
2. दबाना, नियंत्रित करना, विरोध करना –भट्टि० ९।२७
3. बन्द करना ।
ii (चुरा० उभ० वरयति-ते)
1. वरण करना, चुनना –वरं वरयते कन्या माता वित्तम् पिता श्रुतम् –पंच० ३।६७
2. विवाह के लिए पसंद करना
3. याचन करना, प्रार्थना करना, निवेदन करना ।