वृज्
i (अदा० आ० वृक्ते) टाल जाना, कतराना, परित्याग करना ।
ii (रुधा० पर० वृणक्ति)
1. टाला जाना, कतराना, छोड़ देना, परित्याग करना
2. चुनना –आसामेकतमां वृंग्धि सवर्णां स्वर्गभूषणाम् –भाग०
3. प्रायश्चित करना, पोंछ डालना, निर्मल करना –तन्मे रेतः पिता वृंक्तामित्यस्यैतन्निदर्शनम् –मनु० ९।२०
4. मुडना, आँख फेरना ।
iii (भ्वा० पर०, चुरा० उभ० वर्जति, वर्जयति–ते वर्जित)
1. कतराना, टाल जाना
2. छोड़ना, परित्याग करना
3. निकाल देना. एक ओर रख देना
4. अलग रहना
5. टुकड़े टुकड़े कर देना (कविरहस्य से उद्