वेगवती परि०- सयुगात् सगुरू विषमे चेद् भाविह वेगवती युजि भाद्गौ ।गण०-स, स, स, ग (विषम चरण) भ, भ, भ, ग, ग (सम चरण) ।उदा०- “स्मरवेगवती ब्रजरामा केशववंशरवैरतिमुग्धा। रभसांन्न गुरून् गण०यन्ती केलिनिकुञ्जगृहाय जगाम ॥”